देवशयनी एकादशी 2027 कब है?

2027 में देवशयनी एकादशी बुधवार, 14 जुलाई को है। दोहा में एकादशी तिथि 13 जुलाई, 09:39 से 14 जुलाई, 10:40 तक रहेगी। पारण 15 जुलाई को 04:52 से 07:35 तक है।

देवशयनी एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय दोहा के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

देवशयनी एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय

बुधवार, 14 जुलाई 2027

तिथि
एकादशी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
आषाढ़
तिथि आरंभ
13 जुलाई, 09:39
तिथि समाप्त
14 जुलाई, 10:40
दिन का निर्णय
सूर्योदय
दोहा में सूर्योदय
14 जुलाई, 04:52

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: देवशयनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

देवशयनी एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त

देवशयनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तदोहा में समयप्रकृति
अमृत काल 13:34 से 15:17 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 03:28 से 04:10 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिदोहा में समय
राहु काल 11:39 से 13:21
यमगण्ड काल 06:33 से 08:15
दुर्मुहूर्त (पहला) 11:12 से 12:06

ऊपर का हर समय दोहा के लिए बुधवार, 14 जुलाई 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

देवशयनी एकादशी 2027 पारण का समय

गुरुवार, 15 जुलाई 2027, 04:52 से 07:35

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 14 जुलाई, 17:03 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

देवशयनी एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
बुधवार, 14 जुलाई 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
बुधवार, 14 जुलाई 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; बुधवार, 14 जुलाई 2027 का अरुणोदय (14 जुला, 03:16) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन दोहा के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

देवशयनी एकादशी व्रत कथा और महत्व

अन्य नाम: हरिशयनी, आषाढ़ी, पद्मा एकादशी।

देवशयनी एकादशी आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी है — वह दिन जब भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर चार महीने की योगनिद्रा में जाते हैं। इसी से चातुर्मास शुरू होता है, जिसमें विवाह और नए शुभ कार्य टाले जाते हैं, और जो देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है। महाराष्ट्र में यह आषाढ़ी एकादशी है, जब पंढरपुर की वारी विट्ठल के दर्शन को पहुँचती है; इसे हरिशयनी और पद्मा एकादशी भी कहते हैं।

देवशयनी एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: भविष्योत्तर पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य, जहाँ यह कथा पहले ब्रह्मा जी नारद को सुनाते हैं।

सतयुग में धर्मात्मा राजा मांधाता का राज्य सुखी और समृद्ध था। फिर लगातार तीन साल वर्षा नहीं हुई। फ़सलें सूख गईं, अन्न के भंडार खाली हो गए, और प्रजा महल में आकर पूछने लगी कि किस दोष से यह विपत्ति आई है।

मांधाता को अपने शासन में कोई दोष नहीं दिखा। कुछ साथियों को लेकर वे उत्तर खोजने वन में निकले और ब्रह्मा जी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुँचे।

राजा ने ऋषि को अकाल की बात बताई और उपाय पूछा। अंगिरा ने उस युग के नियमों से एक कारण बताया, पर उपाय ऐसा दिया जिसमें किसी को दंड न देना पड़े: राजा और प्रजा आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पद्मा एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा से रखें।

मांधाता ने लौटकर पूरे राज्य में, हर घर में यह व्रत रखवाया। पुराण कहता है कि वर्षा हुई, खेत भर गए और प्रजा फिर सुखी हो गई। श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि इसी एकादशी से भगवान विष्णु का शयन आरंभ होता है, और जो आने वाले चार महीनों में उनकी कृपा चाहता है, उसे यह व्रत रखना चाहिए।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में देवशयनी एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति दोहा के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 शनिवार, 25 जुलाई 2026 बीत गई
2027 बुधवार, 14 जुलाई 2027 आने वाली
2028 रविवार, 2 जुलाई 2028 आने वाली

पंचांगों में देवशयनी एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग देवशयनी एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: देवशयनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

देवशयनी एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में देवशयनी एकादशी कब है?

2027 में देवशयनी एकादशी बुधवार, 14 जुलाई को है। दोहा में एकादशी तिथि 13 जुलाई, 09:39 से 14 जुलाई, 10:40 तक रहेगी। पारण 15 जुलाई को 04:52 से 07:35 तक है।

देवशयनी एकादशी की तिथि क्या है?

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। दोहा में यह तिथि 13 जुलाई, 09:39 से 14 जुलाई, 10:40 तक है, और देवशयनी एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

देवशयनी एकादशी का पारण कब करें?

गुरुवार, 15 जुलाई 2027 को 04:52 से 07:35 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

दूसरे कैलेंडर में देवशयनी एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल देवशयनी एकादशी कब है?

2028 में रविवार, 2 जुलाई।

देवशयनी एकादशी क्यों रखी जाती है?

देवशयनी एकादशी आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी है — वह दिन जब भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर चार महीने की योगनिद्रा में जाते हैं। इसी से चातुर्मास शुरू होता है, जिसमें विवाह और नए शुभ कार्य टाले जाते हैं, और जो देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है। महाराष्ट्र में यह आषाढ़ी एकादशी है, जब पंढरपुर की वारी विट्ठल के दर्शन को पहुँचती है; इसे हरिशयनी और पद्मा एकादशी भी कहते हैं।

देवशयनी एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा भविष्योत्तर पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य, जहाँ यह कथा पहले ब्रह्मा जी नारद को सुनाते हैं में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव देवशयनी एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों बुधवार, 14 जुलाई 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।