शुक्ल पक्ष · अष्टमी तिथि · कार्तिक
गोपाष्टमी 2026 कब है?
2026 में गोपाष्टमी मंगलवार, 17 नवंबर को है। वाराणसी में अष्टमी तिथि 17 नवंबर, 04:20 से 18 नवंबर, 06:06 तक रहेगी।
गोपाष्टमी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
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इस पेज का हर समय वाराणसी के लिए निकाला गया है।
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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।
वाराणसी के लिए गणना
गोपाष्टमी 2026: तारीख और तिथि का समय
मंगलवार, 17 नवंबर 2026
- तिथि
- अष्टमी, शुक्ल पक्ष
- हिंदू मास
- कार्तिक
- तिथि आरंभ
- 17 नवंबर, 04:20
- तिथि समाप्त
- 18 नवंबर, 06:06
- दिन का निर्णय
- सूर्योदय
- वाराणसी में सूर्योदय
- 17 नवंबर, 06:16
ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: गोपाष्टमी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
अर्थ और परंपरा
गोपाष्टमी क्या है?
गोपाष्टमी कार्तिक शुक्ल अष्टमी है — परंपरा के अनुसार वह दिन जब बालक कृष्ण पहली बार बछड़ों के बजाय गायों को चराने ले गए। यह गौ और उनकी सेवा करने वालों का पर्व है, जो ब्रज, राजस्थान और पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है।
- गाय-बछड़ों को नहलाकर सजाया और खिलाया जाता है; गौशालाओं में पूजा होती है, और कई परिवार गुड़ और हरा चारा अर्पित करते हैं।
- यह गोवर्धन पूजा के एक सप्ताह बाद आती है — कार्तिक का वह दूसरा पर्व जो कृष्ण को ग्वाले के रूप में याद करता है।
- तारीख वह दिन है जिसके सूर्योदय पर कार्तिक शुक्ल अष्टमी हो, जो 2016 से 2036 तक हर साल द्रिक पंचांग की तारीख से मेल खाता है।
मुहूर्त · वाराणसी
गोपाष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त
गोपाष्टमी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।
उस दिन के शुभ समय
| मुहूर्त | वाराणसी में समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 11:21 से 12:04 | शुभ |
| अमृत काल | 17:11 से 18:56 | सर्वाधिक शुभ |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:31 से 05:23 | शुभ |
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
| अवधि | वाराणसी में समय |
|---|---|
| राहु काल | 14:26 से 15:47 |
| यमगण्ड काल | 08:59 से 10:21 |
| दुर्मुहूर्त (पहला) | 08:26 से 09:10 |
| वर्ज्यम् | 06:40 से 08:25 |
ऊपर का हर समय वाराणसी के लिए मंगलवार, 17 नवंबर 2026 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।
आने वाले वर्षों में गोपाष्टमी की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति वाराणसी के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2026 | मंगलवार, 17 नवंबर 2026 | आने वाली |
| 2027 | शनिवार, 6 नवंबर 2027 | आने वाली |
| 2028 | बुधवार, 25 अक्तूबर 2028 | आने वाली |
पंचांगों में गोपाष्टमी की तारीख अलग क्यों होती है
दो पंचांग गोपाष्टमी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
- तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
- महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
- दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: गोपाष्टमी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
- शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
आगे आने वाले त्योहार
- शारदीय नवरात्रि — रविवार, 11 अक्तूबर से सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 तक
- दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) — शनिवार, 17 अक्तूबर 2026
- दुर्गा अष्टमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- महा नवमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- दशहरा (विजयादशमी) — मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026
- पापांकुशा एकादशी — गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
- शरद पूर्णिमा — रविवार, 25 अक्तूबर 2026
- करवा चौथ — गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026
संबंधित पेज
गोपाष्टमी से जुड़े सामान्य प्रश्न
2026 में गोपाष्टमी कब है?
2026 में गोपाष्टमी मंगलवार, 17 नवंबर को है। वाराणसी में अष्टमी तिथि 17 नवंबर, 04:20 से 18 नवंबर, 06:06 तक रहेगी।
गोपाष्टमी की तिथि क्या है?
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि। वाराणसी में यह तिथि 17 नवंबर, 04:20 से 18 नवंबर, 06:06 तक है, और गोपाष्टमी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।
दूसरे कैलेंडर में गोपाष्टमी की तारीख अलग क्यों है?
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
अगले साल गोपाष्टमी कब है?
2027 में शनिवार, 6 नवंबर; 2028 में बुधवार, 25 अक्तूबर।