काल भैरव जयंती 2026 कब है?

2026 में काल भैरव जयंती मंगलवार, 1 दिसंबर को है। इंदौर में काल भैरव पूजा का शुभ मुहूर्त 17:41 से 20:05 तक है।

काल भैरव जयंती कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह पूर्णिमांत गणना में मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। दक्षिण और पश्चिम भारत की अमांत गणना में यही तिथि कार्तिक कृष्ण अष्टमी कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय इंदौर के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

काल भैरव जयंती 2026: तारीख और तिथि का समय

मंगलवार, 1 दिसंबर 2026

तिथि
अष्टमी, कृष्ण पक्ष
हिंदू मास
मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत) / कार्तिक (अमांत)
तिथि आरंभ
1 दिसंबर, 00:12
तिथि समाप्त
1 दिसंबर, 23:14
दिन का निर्णय
प्रदोष काल
इंदौर में प्रदोष काल
17:41 से 20:05

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: काल भैरव जयंती का निर्णय सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके प्रदोष काल पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

काल भैरव जयंती क्या है?

काल भैरव जयंती (कालभैरव या भैरव अष्टमी) शिव के उग्र रूप काल भैरव के प्राकट्य का दिन है, जो काशी के कोतवाल माने जाते हैं। यह उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी है — दक्षिण और पश्चिम की अमांत गणना में यही दिन कार्तिक कृष्ण अष्टमी कहलाता है।

  • तारीख प्रदोष काल यानी शाम को चल रही अष्टमी से तय होती है, जो 2016 से 2029 तक हर साल द्रिक पंचांग की तारीख देती है। सूर्योदय वाला नियम इनमें से लगभग आधे सालों में इसे एक दिन बाद रख देता है।
  • भक्त भैरव मंदिरों में दर्शन करते हैं — वाराणसी और उज्जैन के काल भैरव मंदिर सबसे प्रसिद्ध हैं — और कई लोग व्रत और रात्रि जागरण रखते हैं।
  • हर महीने की कृष्ण अष्टमी कालाष्टमी होती है; उनमें यही भैरव के जन्म की मानी जाती है।

काल भैरव जयंती 2026 काल भैरव पूजा मुहूर्त

17:41 से 20:05

यह अवधि प्रदोष काल और अष्टमी तिथि का मेल है — वह क्षण जिस पर यह पर्व तय होता है, और वह तिथि जो इसे परिभाषित करती है। अकेला कोई एक हिस्सा उत्तर नहीं है: केवल प्रदोष काल ऐसा समय भी दे सकता है जब तिथि ख़त्म हो चुकी हो, और केवल तिथि लगभग पूरा दिन दे देती।

प्रदोष काल
17:41 से 20:05
अष्टमी तिथि
1 दिसंबर, 00:12 से 1 दिसंबर, 23:14

प्रदोष काल सूर्यास्त से शुरू होकर तीन मुहूर्त — लगभग 2 घंटे 24 मिनट — तक रहता है। जो पर्व प्रदोष में मनाया जाता है, उसकी पूजा इसी अवधि के भीतर होती है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तइंदौर में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 11:53 से 12:37 शुभ
अमृत काल 02:32 से 04:08 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 05:04 से 05:57 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिइंदौर में समय
राहु काल 14:58 से 16:19
यमगण्ड काल 09:32 से 10:54
दुर्मुहूर्त (पहला) 09:00 से 09:43
वर्ज्यम् 16:59 से 18:34

ऊपर का हर समय इंदौर के लिए मंगलवार, 1 दिसंबर 2026 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

आने वाले वर्षों में काल भैरव जयंती की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति इंदौर के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 मंगलवार, 1 दिसंबर 2026 आने वाली
2027 शनिवार, 20 नवंबर 2027 आने वाली
2028 गुरुवार, 9 नवंबर 2028 आने वाली

पंचांगों में काल भैरव जयंती की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग काल भैरव जयंती की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: काल भैरव जयंती का निर्णय प्रदोष काल से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

काल भैरव जयंती से जुड़े सामान्य प्रश्न

2026 में काल भैरव जयंती कब है?

2026 में काल भैरव जयंती मंगलवार, 1 दिसंबर को है। इंदौर में काल भैरव पूजा का शुभ मुहूर्त 17:41 से 20:05 तक है।

काल भैरव जयंती की तिथि क्या है?

मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत) / कार्तिक (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि। इंदौर में यह तिथि 1 दिसंबर, 00:12 से 1 दिसंबर, 23:14 तक है, और काल भैरव जयंती का दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में चल रही तिथि से तय होता है।

इंदौर में काल भैरव जयंती का शुभ मुहूर्त क्या है?

1 दिसंबर को 17:41 से 20:05 तक। यह प्रदोष काल और अष्टमी तिथि का मेल है, इंदौर के लिए निकाला गया — अवधि आपके शहर के सूर्यास्त के साथ बदलती है, और तिथि उसके बीच में भी ख़त्म हो सकती है।

दूसरे कैलेंडर में काल भैरव जयंती की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल काल भैरव जयंती कब है?

2027 में शनिवार, 20 नवंबर; 2028 में गुरुवार, 9 नवंबर।