शुक्ल पक्ष · एकादशी तिथि · अधिक चैत्र
पद्मिनी एकादशी 2029 कब है?
2029 में पद्मिनी एकादशी सोमवार, 26 मार्च को है। कोलकाता में एकादशी तिथि 25 मार्च, 23:37 से 26 मार्च, 21:37 तक रहेगी। पारण 27 मार्च को 05:33 से 08:01 तक है।
पद्मिनी एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में Adhika मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
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इस पेज का हर समय कोलकाता के लिए निकाला गया है।
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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।
कोलकाता के लिए गणना
पद्मिनी एकादशी 2029: तारीख और तिथि का समय
सोमवार, 26 मार्च 2029
- तिथि
- एकादशी, शुक्ल पक्ष
- हिंदू मास
- अधिक चैत्र
- तिथि आरंभ
- 25 मार्च, 23:37
- तिथि समाप्त
- 26 मार्च, 21:37
- दिन का निर्णय
- सूर्योदय
- कोलकाता में सूर्योदय
- 26 मार्च, 05:34
ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: पद्मिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
मुहूर्त · कोलकाता
पद्मिनी एकादशी 2029 शुभ मुहूर्त
पद्मिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।
उस दिन के शुभ समय
| मुहूर्त | कोलकाता में समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 11:17 से 12:06 | शुभ |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:00 से 04:47 | शुभ |
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
| अवधि | कोलकाता में समय |
|---|---|
| राहु काल | 07:06 से 08:38 |
| यमगण्ड काल | 10:10 से 11:42 |
| दुर्मुहूर्त (पहला) | 12:06 से 12:55 |
| दुर्मुहूर्त (दूसरा) | 14:33 से 15:22 |
| वर्ज्यम् | 21:07 से 22:37 |
ऊपर का हर समय कोलकाता के लिए सोमवार, 26 मार्च 2029 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।
पारण · कोलकाता
पद्मिनी एकादशी 2029 पारण का समय
मंगलवार, 27 मार्च 2029, 05:33 से 08:01
पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 27 मार्च, 02:56 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।
व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
शुक्ल पक्ष · अधिक चैत्र
पद्मिनी एकादशी 2029: स्मार्त और वैष्णव तारीख
पद्मिनी एकादशी केवल उस वर्ष आती है जिसमें अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) हो — लगभग हर तीसरे वर्ष। नीचे की तालिका में वे वर्ष हैं।
- इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
- सोमवार, 26 मार्च 2029 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
- वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
- सोमवार, 26 मार्च 2029 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; सोमवार, 26 मार्च 2029 का अरुणोदय (26 मार्च, 03:58) एकादशी में है, दशमी में नहीं।
ऊपर का हर दिन कोलकाता के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।
महत्व और व्रत कथा
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा और महत्व
अन्य नाम: कमला एकादशी।
पद्मिनी एकादशी अधिक मास की शुक्ल एकादशी है — वह अतिरिक्त चंद्र मास, पुरुषोत्तम मास, जो चंद्र कैलेंडर को ऋतुओं के साथ रखता है और भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप को समर्पित है। अधिक मास लगभग हर तीसरे साल आता है, इसलिए यह एकादशी भी। इसे कमला एकादशी भी कहते हैं, और कम अवसर मिलने के कारण इसे विशेष निष्ठा से रखा जाता है।
पद्मिनी एकादशी की कथा
संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: स्कंद पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य, जहाँ यह कथा पहले पुलस्त्य मुनि नारद को सुनाते हैं।
त्रेता युग में माहिष्मती के राजा कृतवीर्य की हज़ार रानियाँ थीं, पर एक भी पुत्र नहीं। राज्य मंत्रियों को सौंपकर वे अपनी रानी पद्मिनी के साथ — जो राजा हरिश्चंद्र की पुत्री थीं — गंधमादन पर्वत पर गए और दस हज़ार वर्ष कठोर तप किया, पर कोई फल नहीं मिला।
तप से दुर्बल हुए पति को देखकर पद्मिनी ज्ञानी अनसूया के पास गईं, जो अत्रि मुनि की पत्नी थीं, और पूछा कि उनसे क्या छूट गया है। अनसूया ने ऐसा व्रत बताया जो तीन साल में एक बार आता है: अधिक मास की शुक्ल एकादशी — वह मास जो पुरुषोत्तम विष्णु को प्रिय है।
पद्मिनी ने ठीक वैसे ही व्रत रखा — उपवास, रात भर पूजा-जागरण और पुण्य भगवान को अर्पित। प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और वर माँगने को कहा; पद्मिनी ने वह वर पति के लिए माँगा। राजा ने ऐसा पुत्र माँगा जिसे देवता, मनुष्य या दैत्य कोई न हरा सके, और भगवान ने यह वर दिया।
उनके यहाँ जन्मे सहस्त्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन। श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि अपने मास की तरह दुर्लभ यह एकादशी उस रानी के नाम पर है जिसने इसे रखा था — पद्मिनी।
व्रत कैसे रखा जाता है
- व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
- एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
- भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
- पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।
उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
सभी 26 · कोलकाता
सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख
साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।
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- पद्मिनी एकादशी · सोमवार, 26 मार्च 2029
- परमा एकादशी · सोमवार, 9 अप्रैल 2029
आने वाले वर्षों में पद्मिनी एकादशी की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति कोलकाता के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2026 | बुधवार, 27 मई 2026 | बीत गई |
| 2029 | सोमवार, 26 मार्च 2029 | आने वाली |
| 2031 | गुरुवार, 28 अगस्त 2031 | आने वाली |
| 2034 | मंगलवार, 27 जून 2034 | आने वाली |
पंचांगों में पद्मिनी एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है
दो पंचांग पद्मिनी एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
- तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
- महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
- दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: पद्मिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
- शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
आगे आने वाले त्योहार
- शारदीय नवरात्रि — रविवार, 11 अक्तूबर से सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 तक
- दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) — रविवार, 18 अक्तूबर 2026
- दुर्गा अष्टमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- महा नवमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- दशहरा (विजयादशमी) — बुधवार, 21 अक्तूबर 2026
- पापांकुशा एकादशी — गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
- शरद पूर्णिमा — रविवार, 25 अक्तूबर 2026
- करवा चौथ — गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026
संबंधित पेज
पद्मिनी एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न
2029 में पद्मिनी एकादशी कब है?
2029 में पद्मिनी एकादशी सोमवार, 26 मार्च को है। कोलकाता में एकादशी तिथि 25 मार्च, 23:37 से 26 मार्च, 21:37 तक रहेगी। पारण 27 मार्च को 05:33 से 08:01 तक है।
पद्मिनी एकादशी की तिथि क्या है?
अधिक चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। कोलकाता में यह तिथि 25 मार्च, 23:37 से 26 मार्च, 21:37 तक है, और पद्मिनी एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।
पद्मिनी एकादशी का पारण कब करें?
मंगलवार, 27 मार्च 2029 को 05:33 से 08:01 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।
दूसरे कैलेंडर में पद्मिनी एकादशी की तारीख अलग क्यों है?
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
अगले साल पद्मिनी एकादशी कब है?
2031 में गुरुवार, 28 अगस्त; 2034 में मंगलवार, 27 जून।
पद्मिनी एकादशी क्यों रखी जाती है?
पद्मिनी एकादशी अधिक मास की शुक्ल एकादशी है — वह अतिरिक्त चंद्र मास, पुरुषोत्तम मास, जो चंद्र कैलेंडर को ऋतुओं के साथ रखता है और भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप को समर्पित है। अधिक मास लगभग हर तीसरे साल आता है, इसलिए यह एकादशी भी। इसे कमला एकादशी भी कहते हैं, और कम अवसर मिलने के कारण इसे विशेष निष्ठा से रखा जाता है।
पद्मिनी एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?
कथा स्कंद पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य, जहाँ यह कथा पहले पुलस्त्य मुनि नारद को सुनाते हैं में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।
क्या स्मार्त और वैष्णव पद्मिनी एकादशी अलग दिन है?
नहीं, इस बार दोनों सोमवार, 26 मार्च 2029 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।