परिवर्तिनी एकादशी 2027 कब है?

2027 में परिवर्तिनी एकादशी शनिवार, 11 सितंबर को है। हैदराबाद में एकादशी तिथि 10 सितंबर, 17:01 से 11 सितंबर, 19:37 तक रहेगी। पारण 12 सितंबर को 06:03 से 08:31 तक है।

परिवर्तिनी एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय हैदराबाद के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय

शनिवार, 11 सितंबर 2027

तिथि
एकादशी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
भाद्रपद
तिथि आरंभ
10 सितंबर, 17:01
तिथि समाप्त
11 सितंबर, 19:37
दिन का निर्णय
सूर्योदय
हैदराबाद में सूर्योदय
11 सितंबर, 06:03

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: परिवर्तिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

परिवर्तिनी एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त

परिवर्तिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तहैदराबाद में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 11:48 से 12:37 शुभ
अमृत काल 19:44 से 21:33 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 04:29 से 05:16 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिहैदराबाद में समय
राहु काल 09:08 से 10:40
यमगण्ड काल 13:45 से 15:17
दुर्मुहूर्त (पहला) 06:03 से 06:52
दुर्मुहूर्त (दूसरा) 06:52 से 07:41
वर्ज्यम् 08:53 से 10:41

ऊपर का हर समय हैदराबाद के लिए शनिवार, 11 सितंबर 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

परिवर्तिनी एकादशी 2027 पारण का समय

रविवार, 12 सितंबर 2027, 06:03 से 08:31

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 12 सितंबर, 02:16 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

परिवर्तिनी एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
शनिवार, 11 सितंबर 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
शनिवार, 11 सितंबर 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; शनिवार, 11 सितंबर 2027 का अरुणोदय (11 सित, 04:27) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन हैदराबाद के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा और महत्व

अन्य नाम: पार्श्व, वामन, जलझूलनी एकादशी।

परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी है, चातुर्मास के बीच में: माना जाता है कि देवशयनी से सोए भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं — इसीलिए इसे पार्श्व एकादशी भी कहते हैं। इस दिन विष्णु के वामन रूप की पूजा होती है, जिनकी कथा इससे जुड़ी है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में यह जलझूलनी एकादशी है, जब मंदिरों की प्रतिमाएँ शोभायात्रा में जलाशय तक ले जाई जाती हैं।

परिवर्तिनी एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य, जिसमें भागवत पुराण की वामन कथा दोहराई गई है।

त्रेता युग में प्रह्लाद के पौत्र बलि विष्णु के भक्त और बड़े दानी थे, पर उनकी शक्ति इतनी बढ़ गई कि उन्होंने तीनों लोक जीत लिए और इंद्र का स्वर्ग छिन गया। देवता भगवान विष्णु की शरण में गए।

विष्णु ने वामन रूप में — एक छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में — जन्म लिया और बलि के महायज्ञ में पहुँचे, जहाँ बलि ने जो माँगा जाए वह देने का संकल्प लिया था। वामन ने केवल तीन पग भूमि माँगी। बलि के गुरु शुक्राचार्य ने चेताया कि यह बालक कौन है, पर बलि अपने वचन से नहीं हटे।

वामन ने विराट रूप धारण किया। एक पग में पृथ्वी और दूसरे में स्वर्ग नाप लिया, और तीसरे के लिए कुछ न बचा। बलि ने झुककर अपना सिर आगे कर दिया; भगवान ने उस पर पैर रखकर उन्हें सुतल लोक का राजा बनाकर भेज दिया।

बलि के समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उनके साथ रहने का वचन दिया। एकादशी माहात्म्य कहता है कि विष्णु का एक रूप बलि के पास रहता है और दूसरा चातुर्मास में शेषनाग पर शयन करता है, और इसी एकादशी को सोए हुए भगवान करवट बदलते हैं — इसीलिए यह परिवर्तिनी कहलाती है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में परिवर्तिनी एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति हैदराबाद के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 मंगलवार, 22 सितंबर 2026 बीत गई
2027 शनिवार, 11 सितंबर 2027 आने वाली
2028 बुधवार, 30 अगस्त 2028 आने वाली

पंचांगों में परिवर्तिनी एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग परिवर्तिनी एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: परिवर्तिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

परिवर्तिनी एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में परिवर्तिनी एकादशी कब है?

2027 में परिवर्तिनी एकादशी शनिवार, 11 सितंबर को है। हैदराबाद में एकादशी तिथि 10 सितंबर, 17:01 से 11 सितंबर, 19:37 तक रहेगी। पारण 12 सितंबर को 06:03 से 08:31 तक है।

परिवर्तिनी एकादशी की तिथि क्या है?

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। हैदराबाद में यह तिथि 10 सितंबर, 17:01 से 11 सितंबर, 19:37 तक है, और परिवर्तिनी एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

परिवर्तिनी एकादशी का पारण कब करें?

रविवार, 12 सितंबर 2027 को 06:03 से 08:31 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

दूसरे कैलेंडर में परिवर्तिनी एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल परिवर्तिनी एकादशी कब है?

2028 में बुधवार, 30 अगस्त।

परिवर्तिनी एकादशी क्यों रखी जाती है?

परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी है, चातुर्मास के बीच में: माना जाता है कि देवशयनी से सोए भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं — इसीलिए इसे पार्श्व एकादशी भी कहते हैं। इस दिन विष्णु के वामन रूप की पूजा होती है, जिनकी कथा इससे जुड़ी है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में यह जलझूलनी एकादशी है, जब मंदिरों की प्रतिमाएँ शोभायात्रा में जलाशय तक ले जाई जाती हैं।

परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य, जिसमें भागवत पुराण की वामन कथा दोहराई गई है में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव परिवर्तिनी एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों शनिवार, 11 सितंबर 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।