पौष पुत्रदा एकादशी 2027 कब है?

2027 में पौष पुत्रदा एकादशी सोमवार, 18 जनवरी को है। दुबई में एकादशी तिथि 18 जनवरी, 08:57 से 19 जनवरी, 06:20 तक रहेगी। पारण 19 जनवरी को 13:34 से 15:44 तक है।

पौष पुत्रदा एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय दुबई के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

पौष पुत्रदा एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय

सोमवार, 18 जनवरी 2027

तिथि
एकादशी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
पौष
तिथि आरंभ
18 जनवरी, 08:57
तिथि समाप्त
19 जनवरी, 06:20
दिन का निर्णय
सूर्योदय
दुबई में सूर्योदय
18 जनवरी, 07:05

इस बार तिथि क्षय है। एकादशी तिथि एक निर्णायक क्षण के बाद शुरू होकर अगले से पहले ख़त्म हो जाती है, यानी किसी को नहीं छूती, और सामान्य नियम दिन नहीं चुन पाता। पर्व रद्द नहीं होता: वह उस दिन मनाया जाता है जिस दिन यह तिथि चलती है, जो ऊपर की तारीख है। यह बताना ज़रूरी है — सिर्फ़ तारीख छापने का मतलब होता कि वह नियम लागू हुआ जो इस साल लागू नहीं हुआ।

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: पौष पुत्रदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

पौष पुत्रदा एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त

पौष पुत्रदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तदुबई में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 12:07 से 12:50 शुभ
अमृत काल 17:21 से 18:50 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 05:19 से 06:12 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिदुबई में समय
राहु काल 08:26 से 09:47
यमगण्ड काल 11:08 से 12:29
दुर्मुहूर्त (पहला) 12:50 से 13:34
दुर्मुहूर्त (दूसरा) 15:00 से 15:43
वर्ज्यम् 08:24 से 09:53

ऊपर का हर समय दुबई के लिए सोमवार, 18 जनवरी 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

पौष पुत्रदा एकादशी 2027 पारण का समय

मंगलवार, 19 जनवरी 2027, 13:34 से 15:44

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 19 जनवरी, 11:33 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। इस बार हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) पूरे प्रातःकाल तक चलता है। हरि वासर में व्रत नहीं खोला जाता, और ऐसी स्थिति में परंपरा मध्याह्न बीतने तक रुकने को कहती है — इसलिए पारण अपराह्न में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

पौष पुत्रदा एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
सोमवार, 18 जनवरी 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
मंगलवार, 19 जनवरी 2027 — एकादशी (18 जन, 08:57 से 19 जन, 06:20) मंगलवार, 19 जनवरी 2027 के अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — में भी है, इसलिए वैष्णव व्रत उस अगली सुबह रखा जाता है।

ऊपर का हर दिन दुबई के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा और महत्व

पौष पुत्रदा एकादशी पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी है, दिसंबर के अंत या जनवरी में — साल की दो पुत्रदा एकादशियों में से दूसरी; पहली श्रावण में आती है। संतान की कामना रखने वाले दंपती परंपरा से यह व्रत रखते हैं, और आज यह संतान के कल्याण की प्रार्थना के रूप में भी रखा जाता है। जब यह सूर्य के धनु राशि में रहते पड़ती है, तो दक्षिण भारत में वैकुंठ एकादशी भी होती है; जिन वर्षों में ऐसा है, यह पेज बताता है।

पौष पुत्रदा एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: भविष्य पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य।

राजा सुकेतुमान रानी शैब्या के साथ भद्रावती पर राज करते थे। धन, विश्वासी दरबार और शांत राज्य — सब था, पर संतान नहीं थी, और राजा सोचते रहते कि उनके बाद पितरों का तर्पण कौन करेगा।

दुख बढ़ता गया, और एक दिन वे किसी को बताए बिना अकेले घोड़े पर वन चले गए। पेड़ों के बीच भटकते-भटकते थके और प्यासे हो गए, और अंत में कमलों से भरे एक सरोवर पर पहुँचे, जिसके किनारे मुनियों का एक समूह वेदपाठ कर रहा था।

राजा ने प्रणाम करके अपना दुख कहा। मुनियों ने — जो सरोवर में स्नान करने आए विश्वेदेव थे — बताया कि आज ही पौष शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी है, और यदि वे इसका व्रत रखें तो उन्हें पुत्र प्राप्त होगा।

सुकेतुमान ने वहीं सरोवर के किनारे व्रत रखा और द्वादशी को मुनियों को फिर प्रणाम कर पारण किया। पुराण कहता है कि घर लौटने के कुछ समय बाद रानी गर्भवती हुईं और उनका पुत्र धर्मात्मा उत्तराधिकारी बना। श्रीकृष्ण कहते हैं कि इसीलिए यह पुत्रदा एकादशी कहलाती है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में पौष पुत्रदा एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति दुबई के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 2026 में नहीं — यह दिसंबर के अंत या जनवरी में पड़ती है, इसलिए किसी अंग्रेज़ी वर्ष में दो और किसी में एक भी नहीं होती —
2027 सोमवार, 18 जनवरी 2027 आने वाली
2028 शनिवार, 8 जनवरी 2028 आने वाली
2028 बुधवार, 27 दिसंबर 2028 आने वाली

पंचांगों में पौष पुत्रदा एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग पौष पुत्रदा एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: पौष पुत्रदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

पौष पुत्रदा एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में पौष पुत्रदा एकादशी कब है?

2027 में पौष पुत्रदा एकादशी सोमवार, 18 जनवरी को है। दुबई में एकादशी तिथि 18 जनवरी, 08:57 से 19 जनवरी, 06:20 तक रहेगी। पारण 19 जनवरी को 13:34 से 15:44 तक है।

पौष पुत्रदा एकादशी की तिथि क्या है?

पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। दुबई में यह तिथि 18 जनवरी, 08:57 से 19 जनवरी, 06:20 तक है, और पौष पुत्रदा एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

इस बार तिथि को क्षय क्यों बताया गया है?

एकादशी तिथि इस बार एक निर्णायक क्षण के बाद शुरू होकर अगले से पहले ख़त्म हो जाती है, यानी किसी को नहीं छूती — यह क्षय तिथि है। पर्व रद्द नहीं होता: वह उसी दिन मनाया जाता है जिस दिन तिथि चलती है, जो ऊपर दी गई तारीख है।

पौष पुत्रदा एकादशी का पारण कब करें?

मंगलवार, 19 जनवरी 2027 को 13:34 से 15:44 तक। इस बार हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) पूरे प्रातःकाल तक चलता है। हरि वासर में व्रत नहीं खोला जाता, और ऐसी स्थिति में परंपरा मध्याह्न बीतने तक रुकने को कहती है — इसलिए पारण अपराह्न में है।

दूसरे कैलेंडर में पौष पुत्रदा एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल पौष पुत्रदा एकादशी कब है?

2028 में शनिवार, 8 जनवरी; 2028 में बुधवार, 27 दिसंबर।

पौष पुत्रदा एकादशी क्यों रखी जाती है?

पौष पुत्रदा एकादशी पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी है, दिसंबर के अंत या जनवरी में — साल की दो पुत्रदा एकादशियों में से दूसरी; पहली श्रावण में आती है। संतान की कामना रखने वाले दंपती परंपरा से यह व्रत रखते हैं, और आज यह संतान के कल्याण की प्रार्थना के रूप में भी रखा जाता है। जब यह सूर्य के धनु राशि में रहते पड़ती है, तो दक्षिण भारत में वैकुंठ एकादशी भी होती है; जिन वर्षों में ऐसा है, यह पेज बताता है।

पौष पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा भविष्य पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव पौष पुत्रदा एकादशी अलग दिन है?

इस बार अलग है: स्मार्त तारीख सोमवार, 18 जनवरी 2027 और वैष्णव (इस्कॉन) तारीख मंगलवार, 19 जनवरी 2027। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय — सूर्योदय से 96 मिनट पहले — पर देखता है।