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गुरु · प्रथम भाव (लग्न)

गुरु पहले भाव में

  • केंद्र
  • त्रिकोण
  • पूर्ण दिग्बल

लग्न में गुरु को दिग्बल मिलता है, और शास्त्रीय ग्रंथ इसे सबसे अच्छी स्थितियों में गिनते हैं: ज्ञान, अच्छा चरित्र, गरिमामय व्यक्तित्व, लंबी आयु, संतान और सम्मान।

भाव
प्रथम भाव (लग्न) — स्वयं, शारीरिक शरीर, रूप, स्वास्थ्य, स्वभाव, अहंकार, जीवन की दिशा।
ग्रह
गुरु: सबसे बड़ा नैसर्गिक शुभ ग्रह — ज्ञान, गुरु, संतान, धन, धर्म और सत्परामर्श का कारक
भाव का प्रकार
केंद्र भाव और त्रिकोण भाव
दिग्बल
पूर्ण — यह इसका सबसे बली भाव है
यहाँ से दृष्टि
पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ भाव (अपने से पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ)
इसकी महादशा
16 वर्ष

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

कर्क, धनु या मीन में यह हंस योग बनाता है, जो पाँच महापुरुष योगों में से एक है।

शिक्षण, परामर्श, कानून और सलाहकार काम इसके अनुकूल हैं; सावधानी वज़न, अति-आशावाद और उपदेश देने की आदत को लेकर है।

राशि से कैसे बदलता है — हर लग्न के लिए

पहले भाव की राशि लग्न पर निर्भर है, और उसी से गुरु का बल बदलता है। कर्क लग्न में यहाँ कर्क आती है, जहाँ गुरु उच्च है; मकर लग्न में मकर, जहाँ यह नीच है।

हर लग्न में गुरु पहले भाव में
लग्नइस भाव की राशिबलकिन भावों का स्वामीयोग और भूमिका
मेषमेषमित्र राशि9 (भाग्य और पिता), 12 (व्यय और विदेश)—
वृषभवृषभशत्रु राशि8 (आयु और अचानक बदलाव), 11 (आय और लाभ)—
मिथुनमिथुनशत्रु राशि7 (विवाह और जीवनसाथी), 10 (करियर और प्रतिष्ठा)—
कर्ककर्कउच्च6 (शत्रु, ऋण और रोग), 9 (भाग्य और पिता)हंस योग (पंच महापुरुष)
सिंहसिंहमित्र राशि5 (संतान और बुद्धि), 8 (आयु और अचानक बदलाव)—
कन्याकन्याशत्रु राशि4 (घर, माता और संपत्ति), 7 (विवाह और जीवनसाथी)—
तुलातुलाशत्रु राशि3 (पराक्रम और भाई-बहन), 6 (शत्रु, ऋण और रोग)—
वृश्चिकवृश्चिकमित्र राशि2 (धन, वाणी और परिवार), 5 (संतान और बुद्धि)—
धनुधनुस्वराशि1 (व्यक्तित्व और स्वास्थ्य), 4 (घर, माता और संपत्ति)हंस योग (पंच महापुरुष); लग्नेश
मकरमकरनीच3 (पराक्रम और भाई-बहन), 12 (व्यय और विदेश)नीच — नीचभंग देखें
कुंभकुंभसम राशि2 (धन, वाणी और परिवार), 11 (आय और लाभ)—
मीनमीनस्वराशि1 (व्यक्तित्व और स्वास्थ्य), 10 (करियर और प्रतिष्ठा)हंस योग (पंच महापुरुष); लग्नेश

यह स्थिति कौन से योग बना सकती है

  • हंस योग (पंच महापुरुष): केंद्र में स्वराशि या उच्च का गुरु — कर्क, धनु, मीन लग्न में।
  • दिग्बल: गुरु को इसी भाव में पूर्ण दिशा-बल मिलता है।

फल कब मिलता है

गुरु की महादशा 16 वर्ष चलती है। यह स्थिति सबसे स्पष्ट तब बोलती है — गुरु की महादशा में, दूसरी महादशाओं के भीतर इसकी अंतर्दशा में, और पहले भाव के स्वामी की दशा में। शनि और गुरु का गोचर जब इस भाव या जन्म के ग्रह पर से गुज़रता है, तब भी यह जागती है।

गुरु की महादशा · अपनी दशा देखें — दशा कैलकुलेटर

उपाय

  • गुरु का मंत्र जपें: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — गुरुवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 5 माला (540 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 19,000 जप पूरे होते हैं।
  • गुरु का दान करें. चना दाल, हल्दी, पीला वस्त्र का दान गुरुवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी शिक्षक, पुरोहित या गुरु को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • गुरु के लिए दैनिक आचरण. हल्दी का तिलक लगाएँ; गुरुजनों और बड़ों का आदर करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · गुरु का पूरा मंत्र

अपनी कुंडली में देखें

कुंडली बनाएँ और भावों वाले कार्ड में पहले भाव का कार्ड देखें: वह बताता है कि वहाँ कौन-सी राशि है, उसका स्वामी कहाँ है और कौन से ग्रह बैठे हैं — यानी गुरु सचमुच इस भाव में है या नहीं, और किस राशि में। ऊपर की तालिका की वह पंक्ति आपके लग्न की है।

अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँनमूना कुंडली पर इंटरैक्टिव कुंडली देखें

पहले भाव में दूसरे ग्रह

दूसरे भावों में गुरु

सामान्य प्रश्न

क्या पहले भाव में गुरु शुभ है या अशुभ?

अकेले इससे कोई फ़ैसला नहीं होता। शिक्षण, परामर्श, कानून और सलाहकार काम इसके अनुकूल हैं; सावधानी वज़न, अति-आशावाद और उपदेश देने की आदत को लेकर है। कर्क लग्न में यहाँ यह उच्च है। मकर लग्न में नीच।

किस लग्न में पहले भाव का गुरु सबसे अच्छा फल देता है?

कर्क (उच्च); धनु (स्वराशि); मीन (स्वराशि) लग्न। पूरी तालिका ऊपर है।

पहले भाव का गुरु फल कब देता है?

गुरु की महादशा (16 वर्ष) में, दूसरी दशाओं में इसकी अंतर्दशा में, और इस भाव के स्वामी की दशा में।

पहले भाव के गुरु के उपाय क्या हैं?

गुरु के मुफ़्त अभ्यास — बीज मंत्र, उसके दिन का दान और एक दैनिक आचरण — ऊपर दिए हैं। केवल एक स्थिति देखकर कोई रत्न नहीं सुझाया जाता।