पुष्य नक्षत्र 2026 कब है?

2026 में दिवाली से पहले चंद्रमा रविवार, 1 नवंबर 2026 04:09 बजे से सोमवार, 2 नवंबर 2026 03:00 बजे तक पुष्य नक्षत्र में रहेगा (दुबई के समय से)। रविवार होने से यह रवि पुष्य योग है: 1 नवंबर, 06:26 से 2 नवंबर, 03:00 तक। दिवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

गुरु पुष्य और रवि पुष्य भी यही नक्षत्र है — गुरुवार या रविवार को पड़ने पर — इसलिए वे इसी पेज पर हैं, किसी दूसरे पेज पर नहीं।

दिवाली 2026 से पहले पुष्य नक्षत्र

1 नवंबर, 04:09 से 2 नवंबर, 03:00 तक

वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए अवधि दिन-दर-दिन दिखाई गई है। गुरुवार वाला हिस्सा गुरु पुष्य और रविवार वाला रवि पुष्य है; सूर्योदय से पहले का छोटा हिस्सा पिछले वार का होता है। दिवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

दिवाली 2026 से पहले पुष्य नक्षत्र, दुबई
वार (सूर्योदय से सूर्योदय)सेतकयोग
शनिवार, 31 अक्तूबर 20261 नवंबर, 04:091 नवंबर, 06:26—
रविवार, 1 नवंबर 20261 नवंबर, 06:262 नवंबर, 03:00रवि पुष्य

पुष्य के भीतर शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया

उन दिनों के शुभ चौघड़िया, केवल उतने हिस्से में जितना पुष्य के भीतर पड़ता है — पुष्य में ख़रीदारी या शुरुआत के लिए पंचांग यही समय बताते हैं।

दिनचौघड़ियादुबई में समय
31 अक्तूबरलाभ04:50 से 06:26
1 नवंबरलाभ09:14 से 10:38
1 नवंबरअमृत10:38 से 12:02
1 नवंबरशुभ13:26 से 14:50
1 नवंबरशुभ17:38 से 19:14
1 नवंबरअमृत19:14 से 20:50
1 नवंबरलाभ01:38 से 03:00

इस पेज का हर समय दुबई के लिए निकाला गया है।

सभी शहर देखें

पुष्य नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण शुरू और ख़त्म होता है — यह चंद्रमा की स्थिति है, कोई स्थानीय घटना नहीं — इसलिए भारत में नीचे के समय नहीं बदलते। शहर बदलने से सूर्योदय बदलता है, जो इस अवधि को वारों में बाँटता है (और किनारों पर गुरु या रवि पुष्य तय करता है), और उसके भीतर का चौघड़िया।

2026 के सभी पुष्य नक्षत्र

चंद्रमा लगभग हर 27.3 दिन में पुष्य से गुज़रता है, इसलिए साल में 13 या 14 बार। हर पंक्ति उस दिन से लिखी है जिसमें पुष्य का सबसे बड़ा हिस्सा है; गुरु और रवि पुष्य वाले हिस्से अपने समय के साथ दिए हैं।

दिनपुष्य आरंभपुष्य समाप्तगुरु / रवि पुष्य
रविवार, 4 जनवरी 20264 जनवरी, 13:415 जनवरी, 11:55 रवि पुष्य: 4 जनवरी, 13:41 से 5 जनवरी, 07:05
रविवार, 1 फ़रवरी 20261 फ़रवरी, 00:041 फ़रवरी, 22:28 रवि पुष्य: 1 फ़रवरी, 07:01 से 1 फ़रवरी, 22:28
शनिवार, 28 फ़रवरी 202628 फ़रवरी, 08:051 मार्च, 07:04 रवि पुष्य: 1 मार्च, 06:41 से 1 मार्च, 07:04
शुक्रवार, 27 मार्च 202627 मार्च, 13:5428 मार्च, 13:20 —
शुक्रवार, 24 अप्रैल 202623 अप्रैल, 19:2724 अप्रैल, 18:44 गुरु पुष्य: 23 अप्रैल, 19:27 से 24 अप्रैल, 05:48
गुरुवार, 21 मई 202621 मई, 02:4222 मई, 01:19 गुरु पुष्य: 21 मई, 05:31 से 22 मई, 01:19
बुधवार, 17 जून 202617 जून, 12:0718 जून, 10:02 गुरु पुष्य: 18 जून, 05:28 से 18 जून, 10:02
बुधवार, 15 जुलाई 202614 जुलाई, 22:3915 जुलाई, 20:16 —
मंगलवार, 11 अगस्त 202611 अगस्त, 08:3912 अगस्त, 06:30 —
सोमवार, 7 सितंबर 20267 सितंबर, 16:448 सितंबर, 15:09 —
सोमवार, 5 अक्तूबर 20264 अक्तूबर, 22:445 अक्तूबर, 21:39 रवि पुष्य: 4 अक्तूबर, 22:44 से 5 अक्तूबर, 06:12
रविवार, 1 नवंबर 20261 नवंबर, 04:092 नवंबर, 03:00 रवि पुष्य: 1 नवंबर, 06:26 से 2 नवंबर, 03:00
शनिवार, 28 नवंबर 202628 नवंबर, 11:2029 नवंबर, 09:29 रवि पुष्य: 29 नवंबर, 06:45 से 29 नवंबर, 09:29
शनिवार, 26 दिसंबर 202625 दिसंबर, 21:2026 दिसंबर, 18:43 —

पुष्य नक्षत्र क्या है, और दिवाली की ख़रीदारी में इसे क्यों देखा जाता है

पुष्य 27 नक्षत्रों में आठवाँ है: निरयन कर्क राशि में 3°20' से 16°40' के बीच चंद्रमा। इसके देवता बृहस्पति हैं और नाम का अर्थ है "पोषण करने वाला"। मुहूर्त ग्रंथ इसे शुरुआत के लिए सबसे अनुकूल नक्षत्रों में गिनते हैं, और दिवाली से पहले वाला पुष्य सोना, चाँदी, वाहन और घर की चीज़ें ख़रीदने का पारंपरिक दिन बन गया है।

  • गुरु पुष्य (गुरुवार को) और रवि पुष्य (रविवार को) — परंपरा इन्हीं दो वार-संयोगों को ख़ास मानती है। वार हिंदू दिन का है, सूर्योदय से सूर्योदय।
  • यही परंपरा विवाह मुहूर्त में पुष्य को नहीं लेती, इसलिए शादी की तारीख इससे नहीं चुनी जाती।
  • ये परंपरा का वर्णन हैं, कोई वादा नहीं। इस दिन कुछ ख़रीदना ज़रूरी नहीं, और इस दिन की ख़रीद का मूल्य उतना ही है जितनी उसकी क़ीमत।
  • नक्षत्र लाहिरी अयनांश से निकाला गया है, जैसे इस साइट का बाकी पंचांग; इसका आरंभ और अंत हर जगह एक ही क्षण होता है।

पुष्य नक्षत्र से जुड़े सामान्य प्रश्न

2026 में दिवाली से पहले पुष्य नक्षत्र कब है?

रविवार, 1 नवंबर 2026 04:09 बजे से सोमवार, 2 नवंबर 2026 03:00 बजे तक, दुबई के समय से। दिवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

2026 में गुरु पुष्य है या रवि पुष्य?

रवि पुष्य योग: पुष्य रविवार को, 1 नवंबर, 06:26 से 2 नवंबर, 03:00 तक। वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए योग पुष्य का वही हिस्सा है जो उस वार के भीतर पड़ता है।

2026 में गुरु पुष्य और रवि पुष्य कितनी बार हैं?

9 बार: रवि पुष्य — रविवार, 4 जनवरी 2026; रवि पुष्य — रविवार, 1 फ़रवरी 2026; रवि पुष्य — रविवार, 1 मार्च 2026; गुरु पुष्य — गुरुवार, 23 अप्रैल 2026; गुरु पुष्य — गुरुवार, 21 मई 2026; गुरु पुष्य — गुरुवार, 18 जून 2026; रवि पुष्य — रविवार, 4 अक्तूबर 2026; रवि पुष्य — रविवार, 1 नवंबर 2026; रवि पुष्य — रविवार, 29 नवंबर 2026।

पुष्य नक्षत्र कितनी देर रहता है?

सामान्यतः 19 से 27 घंटे — चंद्रमा को निरयन राशिचक्र के 13°20' पार करने में जितना समय लगता है, जो उसकी गति के साथ बदलता है। यह लगभग हर 27.3 दिन में लौटता है, इसलिए साल में 13 या 14 बार आता है।

दूसरे पंचांग में समय थोड़ा अलग क्यों है?

पंचांग समय को अलग ढंग से पूर्णांकित करते हैं, इसलिए एक-दो मिनट का अंतर आम है; जो पंचांग लाहिरी के बजाय दूसरा अयनांश लेते हैं, उनमें अंतर ज़्यादा होता है। वार का बँटवारा सूर्योदय से होता है, इसलिए भोर से ठीक पहले शुरू होने वाला पुष्य पिछले वार का गिना जाता है।