कृष्ण पक्ष · एकादशी तिथि · पौष (पूर्णिमांत) / मार्गशीर्ष (अमांत)
सफला एकादशी 2027 कब है?
2027 में सफला एकादशी रविवार, 3 जनवरी को है। श्रीनगर में एकादशी तिथि 2 जनवरी, 14:24 से 3 जनवरी, 16:09 तक रहेगी। पारण 4 जनवरी को 07:36 से 09:36 तक है।
सफला एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यही तिथि पौष कृष्ण एकादशी कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
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इस पेज का हर समय श्रीनगर के लिए निकाला गया है।
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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।
श्रीनगर के लिए गणना
सफला एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय
रविवार, 3 जनवरी 2027
- तिथि
- एकादशी, कृष्ण पक्ष
- हिंदू मास
- पौष (पूर्णिमांत) / मार्गशीर्ष (अमांत)
- तिथि आरंभ
- 2 जनवरी, 14:24
- तिथि समाप्त
- 3 जनवरी, 16:09
- दिन का निर्णय
- सूर्योदय
- श्रीनगर में सूर्योदय
- 3 जनवरी, 07:36
ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: सफला एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
मुहूर्त · श्रीनगर
सफला एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त
सफला एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।
उस दिन के शुभ समय
| मुहूर्त | श्रीनगर में समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:15 से 12:55 | शुभ |
| अमृत काल | 11:58 से 13:43 | सर्वाधिक शुभ |
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:44 से 06:40 | शुभ |
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
| अवधि | श्रीनगर में समय |
|---|---|
| राहु काल | 16:19 से 17:33 |
| यमगण्ड काल | 12:35 से 13:49 |
| दुर्मुहूर्त (पहला) | 16:14 से 16:54 |
| वर्ज्यम् | 02:03 से 03:50 |
ऊपर का हर समय श्रीनगर के लिए रविवार, 3 जनवरी 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।
पारण · श्रीनगर
सफला एकादशी 2027 पारण का समय
सोमवार, 4 जनवरी 2027, 07:36 से 09:36
पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 3 जनवरी, 22:40 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।
व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
कृष्ण पक्ष · पौष (पूर्णिमांत) · मार्गशीर्ष (अमांत)
सफला एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख
उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, और दक्षिण व पश्चिम भारत की अमांत गणना में मार्गशीर्ष मास की। रात एक ही है — दोनों पद्धतियाँ कृष्ण पक्ष को अलग महीने के नाम से गिनती हैं।
- इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
- रविवार, 3 जनवरी 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
- वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
- रविवार, 3 जनवरी 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; रविवार, 3 जनवरी 2027 का अरुणोदय (3 जन, 06:00) एकादशी में है, दशमी में नहीं।
ऊपर का हर दिन श्रीनगर के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।
महत्व और व्रत कथा
सफला एकादशी व्रत कथा और महत्व
सफला एकादशी पूर्णिमांत गणना में पौष कृष्ण पक्ष की एकादशी है — अमांत गणना में मार्गशीर्ष कृष्ण — और प्रायः अंग्रेज़ी वर्ष की पहली या आख़िरी एकादशी। सफला का अर्थ है फल देने वाली: इस दिन भगवान नारायण की पूजा मौसमी फलों, रात भर जलते दीपों और कीर्तन से होती है — और ये सब सीधे इसकी कथा से आते हैं।
सफला एकादशी की कथा
संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: ब्रह्मांड पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य।
चंपावती के राजा महिष्मत के पाँच पुत्र थे, और सबसे बड़ा लुंपक पिता का धन उड़ाता, साधुओं का अपमान करता और प्रजा को सताता था। अंत में राजा ने उसे देश से निकाल दिया, और लुंपक वन में रहने लगा — रात में नगर से चोरी करता और एक पुराने पीपल के नीचे सोता।
एक सर्दी में दशमी की रात इतनी ठंड पड़ी कि वह सो न सका, और सुबह तक अधमरा, सुन्न पड़ा रहा। दोपहर को होश आया तो शिकार करने की शक्ति न थी; वह केवल कुछ गिरे हुए फल बटोर सका। उसने उनमें से एक भी नहीं खाया।
उस रात — एकादशी की रात — फिर उसे नींद नहीं आई। दुखी होकर उसने फल पीपल की जड़ में रखे और कहा, "इनसे भगवान विष्णु प्रसन्न हों।" अनजाने में उसने दिन भर उपवास किया, रात भर जागा और नारायण को फल अर्पित किए — यही पूरा सफला व्रत है।
भोर में आकाशवाणी हुई कि इस व्रत के पुण्य से उसका जीवन सुधर जाएगा। लुंपक बदला हुआ मनुष्य बनकर घर लौटा; पिता ने उसे राज्य सौंपा, जिस पर उसने अच्छा राज किया और बुढ़ापे में वन चला गया। श्रीकृष्ण कहते हैं कि अनजाने में रखा व्रत भी फल देता है — सफला का अर्थ यही है।
व्रत कैसे रखा जाता है
- व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
- एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
- भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
- पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।
उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
सभी 26 · श्रीनगर
सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख
साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।
- पापांकुशा एकादशी · गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
- रमा एकादशी · गुरुवार, 5 नवंबर 2026
- देवउठनी एकादशी · शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
- उत्पन्ना एकादशी · शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
- मोक्षदा एकादशी · रविवार, 20 दिसंबर 2026
- सफला एकादशी · रविवार, 3 जनवरी 2027
- पौष पुत्रदा एकादशी · मंगलवार, 19 जनवरी 2027
- षटतिला एकादशी · मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027
- जया एकादशी · बुधवार, 17 फ़रवरी 2027
- विजया एकादशी · गुरुवार, 4 मार्च 2027
- आमलकी एकादशी · गुरुवार, 18 मार्च 2027
- पापमोचनी एकादशी · शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027
- कामदा एकादशी · शनिवार, 17 अप्रैल 2027
- वरूथिनी एकादशी · रविवार, 2 मई 2027
- मोहिनी एकादशी · रविवार, 16 मई 2027
- अपरा एकादशी · मंगलवार, 1 जून 2027
- निर्जला एकादशी · सोमवार, 14 जून 2027
- योगिनी एकादशी · बुधवार, 30 जून 2027
- देवशयनी एकादशी · बुधवार, 14 जुलाई 2027
- कामिका एकादशी · गुरुवार, 29 जुलाई 2027
- श्रावण पुत्रदा एकादशी · गुरुवार, 12 अगस्त 2027
- अजा एकादशी · शनिवार, 28 अगस्त 2027
- परिवर्तिनी एकादशी · शनिवार, 11 सितंबर 2027
- इंदिरा एकादशी · रविवार, 26 सितंबर 2027
- पद्मिनी एकादशी · सोमवार, 26 मार्च 2029
- परमा एकादशी · सोमवार, 9 अप्रैल 2029
अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ
आने वाले वर्षों में सफला एकादशी की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति श्रीनगर के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2026 | 2026 में नहीं — यह दिसंबर के अंत या जनवरी में पड़ती है, इसलिए किसी अंग्रेज़ी वर्ष में दो और किसी में एक भी नहीं होती | — |
| 2027 | रविवार, 3 जनवरी 2027 | आने वाली |
| 2027 | गुरुवार, 23 दिसंबर 2027 | आने वाली |
| 2028 | मंगलवार, 12 दिसंबर 2028 | आने वाली |
पंचांगों में सफला एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है
दो पंचांग सफला एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
- तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
- महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
- दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: सफला एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
- शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
आगे आने वाले त्योहार
- शारदीय नवरात्रि — रविवार, 11 अक्तूबर से सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 तक
- दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) — शनिवार, 17 अक्तूबर 2026
- दुर्गा अष्टमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- महा नवमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- दशहरा (विजयादशमी) — मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026
- पापांकुशा एकादशी — गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
- शरद पूर्णिमा — रविवार, 25 अक्तूबर 2026
- करवा चौथ — गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026
संबंधित पेज
सफला एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न
2027 में सफला एकादशी कब है?
2027 में सफला एकादशी रविवार, 3 जनवरी को है। श्रीनगर में एकादशी तिथि 2 जनवरी, 14:24 से 3 जनवरी, 16:09 तक रहेगी। पारण 4 जनवरी को 07:36 से 09:36 तक है।
सफला एकादशी की तिथि क्या है?
पौष (पूर्णिमांत) / मार्गशीर्ष (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि। श्रीनगर में यह तिथि 2 जनवरी, 14:24 से 3 जनवरी, 16:09 तक है, और सफला एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।
सफला एकादशी का पारण कब करें?
सोमवार, 4 जनवरी 2027 को 07:36 से 09:36 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।
दूसरे कैलेंडर में सफला एकादशी की तारीख अलग क्यों है?
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
अगले साल सफला एकादशी कब है?
2028 में मंगलवार, 12 दिसंबर।
सफला एकादशी क्यों रखी जाती है?
सफला एकादशी पूर्णिमांत गणना में पौष कृष्ण पक्ष की एकादशी है — अमांत गणना में मार्गशीर्ष कृष्ण — और प्रायः अंग्रेज़ी वर्ष की पहली या आख़िरी एकादशी। सफला का अर्थ है फल देने वाली: इस दिन भगवान नारायण की पूजा मौसमी फलों, रात भर जलते दीपों और कीर्तन से होती है — और ये सब सीधे इसकी कथा से आते हैं।
सफला एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?
कथा ब्रह्मांड पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।
क्या स्मार्त और वैष्णव सफला एकादशी अलग दिन है?
नहीं, इस बार दोनों रविवार, 3 जनवरी 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।