षटतिला एकादशी 2027 कब है?

2027 में षटतिला एकादशी सोमवार, 1 फ़रवरी को है। टोरंटो में एकादशी तिथि 31 जनवरी, 22:12 से 2 फ़रवरी, 00:41 तक रहेगी। पारण 2 फ़रवरी को 07:32 से 09:32 तक है।

षटतिला एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यही तिथि माघ कृष्ण एकादशी कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय टोरंटो के लिए निकाला गया है।

सभी शहर देखें

नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

षटतिला एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय

सोमवार, 1 फ़रवरी 2027

तिथि
एकादशी, कृष्ण पक्ष
हिंदू मास
माघ (पूर्णिमांत) / पौष (अमांत)
तिथि आरंभ
31 जनवरी, 22:12
तिथि समाप्त
2 फ़रवरी, 00:41
दिन का निर्णय
सूर्योदय
टोरंटो में सूर्योदय
1 फ़रवरी, 07:33

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: षटतिला एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

षटतिला एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त

षटतिला एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तटोरंटो में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 12:11 से 12:51 शुभ
अमृत काल 13:00 से 14:47 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 05:41 से 06:37 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिटोरंटो में समय
राहु काल 08:48 से 10:02
यमगण्ड काल 11:16 से 12:31
दुर्मुहूर्त (पहला) 12:51 से 13:30
दुर्मुहूर्त (दूसरा) 14:50 से 15:29

ऊपर का हर समय टोरंटो के लिए सोमवार, 1 फ़रवरी 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

षटतिला एकादशी 2027 पारण का समय

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027, 07:32 से 09:32

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 2 फ़रवरी, 07:21 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

षटतिला एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख

उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, और दक्षिण व पश्चिम भारत की अमांत गणना में पौष मास की। रात एक ही है — दोनों पद्धतियाँ कृष्ण पक्ष को अलग महीने के नाम से गिनती हैं।

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
सोमवार, 1 फ़रवरी 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
सोमवार, 1 फ़रवरी 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; सोमवार, 1 फ़रवरी 2027 का अरुणोदय (1 फ़र, 05:57) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन टोरंटो के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

षटतिला एकादशी व्रत कथा और महत्व

षटतिला एकादशी पूर्णिमांत गणना में माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी है — अमांत गणना में पौष कृष्ण — जनवरी की ठंड में। षटतिला यानी तिल के छह प्रयोग: तिल मिले जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल मिला जल पितरों को, तिल का सेवन और तिल का दान। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है, और सबसे बढ़कर अन्नदान का महत्व है।

षटतिला एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: भविष्योत्तर पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य।

एक ब्राह्मणी विधवा बड़ी निष्ठा से धर्म का पालन करती थी। वह हर व्रत रखती, उपवास से शरीर दुबला कर लेती, और ब्राह्मणों तथा मंदिरों को खुलकर दान देती — पर उसने कभी किसी को अन्न नहीं दिया।

उसकी परीक्षा लेने भगवान विष्णु भिक्षु बनकर उसके द्वार आए और भिक्षा माँगी। झुंझलाकर उसने उनके पात्र में मिट्टी का एक ढेला डाल दिया, और वे चले गए।

मृत्यु के बाद उसके तप के बल से वह स्वर्ग पहुँची, जहाँ उसे एक सुंदर घर मिला — पर बिल्कुल ख़ाली: न अन्न, न भोजन, कुछ नहीं। दुखी होकर वह भगवान के पास गई। भगवान ने कहा कि उसने उपवास बहुत किए पर किसी को भोजन नहीं कराया, और भिक्षु के पात्र में डाला एक ही ढेला था, जिससे उसका घर बना है।

फिर उपाय बताया: जब देवताओं की पत्नियाँ उससे मिलने आएँ, तो वह तब तक द्वार न खोले जब तक वे षटतिला एकादशी का विधान न बता दें। उसने ऐसा ही किया, तिल के छह प्रयोगों के साथ व्रत रखा, और उसका घर अन्न और हर अच्छी वस्तु से भर गया। श्रीकृष्ण कहते हैं कि इस दिन दिया तिल और अन्न कई गुना होकर लौटता है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में षटतिला एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति टोरंटो के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 मंगलवार, 13 जनवरी 2026 बीत गई
2027 सोमवार, 1 फ़रवरी 2027 आने वाली
2028 शुक्रवार, 21 जनवरी 2028 आने वाली

पंचांगों में षटतिला एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग षटतिला एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: षटतिला एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

षटतिला एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में षटतिला एकादशी कब है?

2027 में षटतिला एकादशी सोमवार, 1 फ़रवरी को है। टोरंटो में एकादशी तिथि 31 जनवरी, 22:12 से 2 फ़रवरी, 00:41 तक रहेगी। पारण 2 फ़रवरी को 07:32 से 09:32 तक है।

षटतिला एकादशी की तिथि क्या है?

माघ (पूर्णिमांत) / पौष (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि। टोरंटो में यह तिथि 31 जनवरी, 22:12 से 2 फ़रवरी, 00:41 तक है, और षटतिला एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

षटतिला एकादशी का पारण कब करें?

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027 को 07:32 से 09:32 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

दूसरे कैलेंडर में षटतिला एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल षटतिला एकादशी कब है?

2028 में शुक्रवार, 21 जनवरी।

षटतिला एकादशी क्यों रखी जाती है?

षटतिला एकादशी पूर्णिमांत गणना में माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी है — अमांत गणना में पौष कृष्ण — जनवरी की ठंड में। षटतिला यानी तिल के छह प्रयोग: तिल मिले जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल मिला जल पितरों को, तिल का सेवन और तिल का दान। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है, और सबसे बढ़कर अन्नदान का महत्व है।

षटतिला एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा भविष्योत्तर पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव षटतिला एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों सोमवार, 1 फ़रवरी 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।