मोक्षदा एकादशी 2026 कब है?

2026 में मोक्षदा एकादशी रविवार, 20 दिसंबर को है। गोवा में एकादशी तिथि 19 दिसंबर, 22:10 से 20 दिसंबर, 20:15 तक रहेगी। पारण 21 दिसंबर को 06:56 से 09:10 तक है।

मोक्षदा एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय गोवा के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

मोक्षदा एकादशी 2026: तारीख और तिथि का समय

रविवार, 20 दिसंबर 2026

तिथि
एकादशी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
मार्गशीर्ष
तिथि आरंभ
19 दिसंबर, 22:10
तिथि समाप्त
20 दिसंबर, 20:15
दिन का निर्णय
सूर्योदय
गोवा में सूर्योदय
20 दिसंबर, 06:55

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: मोक्षदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

मोक्षदा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

मोक्षदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तगोवा में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 12:09 से 12:54 शुभ
अमृत काल 08:02 से 09:34 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 05:13 से 06:04 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिगोवा में समय
राहु काल 16:44 से 18:08
यमगण्ड काल 12:32 से 13:56
दुर्मुहूर्त (पहला) 16:38 से 17:23
वर्ज्यम् 11:06 से 12:38
वर्ज्यम् (दूसरा) 23:49 से 01:18

ऊपर का हर समय गोवा के लिए रविवार, 20 दिसंबर 2026 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

मोक्षदा एकादशी 2026 पारण का समय

सोमवार, 21 दिसंबर 2026, 06:56 से 09:10

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 21 दिसंबर, 01:36 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

मोक्षदा एकादशी 2026: स्मार्त और वैष्णव तारीख

इस बार यह एकादशी सूर्य के धनु राशि में रहते पड़ती है — तमिल मार्गऴि मास — इसलिए दक्षिण भारत में रविवार, 20 दिसंबर 2026 को यही वैकुंठ एकादशी के रूप में मनाई जाती है, जब श्रीरंगम, तिरुपति और अन्य विष्णु मंदिरों में वैकुंठ द्वार खोला जाता है।

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
रविवार, 20 दिसंबर 2026 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
रविवार, 20 दिसंबर 2026 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; रविवार, 20 दिसंबर 2026 का अरुणोदय (20 दिस, 05:19) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन गोवा के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा और महत्व

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है — वही मास जिसे श्रीकृष्ण गीता में अपना बताते हैं ("मासानां मार्गशीर्षोऽहम्")। मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली। इस दिन भगवान विष्णु और गीता के वक्ता श्रीकृष्ण की पूजा होती है, और परंपरा में व्रत का पुण्य पितरों के लिए अर्पित किया जाता है — इसकी कथा भी इसी की है।

गीता जयंती इसी एकादशी को मनाई जाती है। परंपरा के अनुसार इसी दिन श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिया था। इस दिन गीता का पाठ — प्रायः पूरे अठारह अध्याय — होता है, और मंदिरों में, विशेषकर स्वयं कुरुक्षेत्र में, गीता पाठ के आयोजन होते हैं। गीता जयंती की कोई अलग तारीख नहीं है: वह मोक्षदा एकादशी ही है, इसलिए वह इसी पेज पर है।

मोक्षदा एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: ब्रह्मांड पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य।

राजा वैखानस चंपक नगर पर राज करते थे और प्रजा का पालन पिता की तरह करते थे। एक रात उन्होंने सपने में देखा कि उनके पिता अधोलोक में कष्ट भोग रहे हैं और उनसे सहायता माँग रहे हैं। व्याकुल होकर उन्होंने सुबह अपने दरबार के विद्वान ब्राह्मणों से उपाय पूछा।

उन्होंने राजा को पर्वत मुनि के आश्रम भेजा, जो भूत, वर्तमान और भविष्य जानते थे। पर्वत मुनि ने ध्यान लगाया और बताया कि राजा के पिता ने अपने जीवन में अपनी एक पत्नी के साथ अन्याय किया था, और वही कर्म उन्हें अब बाँधे हुए है।

मुनि ने कहा कि उपाय निकट ही है। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी — मोक्षदा, मोक्ष देने वाली — का व्रत पूरे परिवार के साथ रखो, और उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दो।

वैखानस ने रानी, संतान और मंत्रियों के साथ ऐसा ही किया। पुराण कहता है कि पुण्य अर्पित करते ही आकाश से फूल बरसे और मुक्त होकर उनके पिता स्वर्ग जाते हुए पुत्र को आशीर्वाद दे गए। कथा के अंत में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि यह व्रत चिंतामणि के समान है, और इसकी कथा सुनना भी पुण्य है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2026 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में मोक्षदा एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति गोवा के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 रविवार, 20 दिसंबर 2026 आने वाली
2027 गुरुवार, 9 दिसंबर 2027 आने वाली
2028 सोमवार, 27 नवंबर 2028 आने वाली

पंचांगों में मोक्षदा एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग मोक्षदा एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: मोक्षदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

मोक्षदा एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2026 में मोक्षदा एकादशी कब है?

2026 में मोक्षदा एकादशी रविवार, 20 दिसंबर को है। गोवा में एकादशी तिथि 19 दिसंबर, 22:10 से 20 दिसंबर, 20:15 तक रहेगी। पारण 21 दिसंबर को 06:56 से 09:10 तक है।

मोक्षदा एकादशी की तिथि क्या है?

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। गोवा में यह तिथि 19 दिसंबर, 22:10 से 20 दिसंबर, 20:15 तक है, और मोक्षदा एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

मोक्षदा एकादशी का पारण कब करें?

सोमवार, 21 दिसंबर 2026 को 06:56 से 09:10 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

दूसरे कैलेंडर में मोक्षदा एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल मोक्षदा एकादशी कब है?

2027 में गुरुवार, 9 दिसंबर; 2028 में सोमवार, 27 नवंबर।

मोक्षदा एकादशी क्यों रखी जाती है?

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है — वही मास जिसे श्रीकृष्ण गीता में अपना बताते हैं ("मासानां मार्गशीर्षोऽहम्")। मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली। इस दिन भगवान विष्णु और गीता के वक्ता श्रीकृष्ण की पूजा होती है, और परंपरा में व्रत का पुण्य पितरों के लिए अर्पित किया जाता है — इसकी कथा भी इसी की है।

मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा ब्रह्मांड पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव मोक्षदा एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों रविवार, 20 दिसंबर 2026 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।