योगिनी एकादशी 2027 कब है?

2027 में योगिनी एकादशी बुधवार, 30 जून को है। गोवा में एकादशी तिथि 29 जून, 22:04 से 30 जून, 20:31 तक रहेगी। पारण 1 जुलाई को 06:07 से 08:43 तक है।

योगिनी एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यही तिथि आषाढ़ कृष्ण एकादशी कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय गोवा के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

योगिनी एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय

बुधवार, 30 जून 2027

तिथि
एकादशी, कृष्ण पक्ष
हिंदू मास
आषाढ़ (पूर्णिमांत) / ज्येष्ठ (अमांत)
तिथि आरंभ
29 जून, 22:04
तिथि समाप्त
30 जून, 20:31
दिन का निर्णय
सूर्योदय
गोवा में सूर्योदय
30 जून, 06:07

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: योगिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

योगिनी एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त

योगिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तगोवा में समयप्रकृति
अमृत काल 16:22 से 17:55 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 04:39 से 05:23 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिगोवा में समय
राहु काल 12:38 से 14:16
यमगण्ड काल 07:44 से 09:22
दुर्मुहूर्त (पहला) 12:12 से 13:04
वर्ज्यम् 07:05 से 08:38

ऊपर का हर समय गोवा के लिए बुधवार, 30 जून 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

योगिनी एकादशी 2027 पारण का समय

गुरुवार, 1 जुलाई 2027, 06:07 से 08:43

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 1 जुलाई, 01:57 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

योगिनी एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख

उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में योगिनी एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, और दक्षिण व पश्चिम भारत की अमांत गणना में ज्येष्ठ मास की। रात एक ही है — दोनों पद्धतियाँ कृष्ण पक्ष को अलग महीने के नाम से गिनती हैं।

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
बुधवार, 30 जून 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
बुधवार, 30 जून 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; बुधवार, 30 जून 2027 का अरुणोदय (30 जून, 04:31) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन गोवा के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

योगिनी एकादशी व्रत कथा और महत्व

योगिनी एकादशी पूर्णिमांत गणना में आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी है — अमांत गणना में ज्येष्ठ कृष्ण — और देवशयनी से चातुर्मास शुरू होने से पहले की अंतिम एकादशी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है, कई जगह पीपल की पूजा के साथ। इसकी कथा एक छूटे हुए कर्तव्य और उससे मिले शाप की है, इसलिए यह दिन अपनी चूक सुधारने से जुड़ा माना जाता है।

योगिनी एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य।

कुबेर की नगरी अलकापुरी में हेममाली नाम के एक यक्ष का एक ही काम था — हर सुबह मानसरोवर से ताज़े फूल लाना, जिनसे कुबेर भगवान शिव की पूजा करते थे।

एक दिन वह फूल लाने के बजाय अपनी पत्नी विशालाक्षी के पास घर चला गया और वहीं रह गया। कुबेर पूजा के समय प्रतीक्षा करते रहे, फिर कारण पता करवाया। जब जाना कि हेममाली केवल अपना कर्तव्य भूल गया था, तो उन्होंने शाप दिया — वह अपना स्थान खोएगा, पत्नी से बिछड़ेगा और पृथ्वी पर कुष्ठ रोग भोगेगा।

हेममाली अलकापुरी से गिरकर कष्ट में वनों में भटकता रहा, और अंत में हिमालय पर मार्कंडेय ऋषि के आश्रम पहुँचा। उसने बिना कोई बहाना बनाए ऋषि को सारा सच बता दिया। उसकी सच्चाई देखकर मार्कंडेय ने कहा — आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत रखो, शाप समाप्त हो जाएगा।

हेममाली ने विधि से व्रत रखा। पुराण कहता है कि शाप उतर गया, उसका शरीर पहले जैसा हो गया और वह अलकापुरी में अपनी पत्नी के पास लौट आया। श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि इस एक व्रत का पुण्य अठासी हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में योगिनी एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति गोवा के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 बीत गई
2027 बुधवार, 30 जून 2027 आने वाली
2028 रविवार, 18 जून 2028 आने वाली

पंचांगों में योगिनी एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग योगिनी एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: योगिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

योगिनी एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में योगिनी एकादशी कब है?

2027 में योगिनी एकादशी बुधवार, 30 जून को है। गोवा में एकादशी तिथि 29 जून, 22:04 से 30 जून, 20:31 तक रहेगी। पारण 1 जुलाई को 06:07 से 08:43 तक है।

योगिनी एकादशी की तिथि क्या है?

आषाढ़ (पूर्णिमांत) / ज्येष्ठ (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि। गोवा में यह तिथि 29 जून, 22:04 से 30 जून, 20:31 तक है, और योगिनी एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

योगिनी एकादशी का पारण कब करें?

गुरुवार, 1 जुलाई 2027 को 06:07 से 08:43 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

दूसरे कैलेंडर में योगिनी एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल योगिनी एकादशी कब है?

2028 में रविवार, 18 जून।

योगिनी एकादशी क्यों रखी जाती है?

योगिनी एकादशी पूर्णिमांत गणना में आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी है — अमांत गणना में ज्येष्ठ कृष्ण — और देवशयनी से चातुर्मास शुरू होने से पहले की अंतिम एकादशी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है, कई जगह पीपल की पूजा के साथ। इसकी कथा एक छूटे हुए कर्तव्य और उससे मिले शाप की है, इसलिए यह दिन अपनी चूक सुधारने से जुड़ा माना जाता है।

योगिनी एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव योगिनी एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों बुधवार, 30 जून 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।