निर्जला एकादशी 2027 कब है?

2027 में निर्जला एकादशी सोमवार, 14 जून को है। काठमांडू में एकादशी तिथि 14 जून, 02:27 से 15 जून, 02:24 तक रहेगी। पारण 15 जून को 13:27 से 16:14 तक है।

निर्जला एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय काठमांडू के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

निर्जला एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय

सोमवार, 14 जून 2027

तिथि
एकादशी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
ज्येष्ठ
तिथि आरंभ
14 जून, 02:27
तिथि समाप्त
15 जून, 02:24
दिन का निर्णय
सूर्योदय
काठमांडू में सूर्योदय
14 जून, 05:07

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: निर्जला एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

निर्जला एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त

निर्जला एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तकाठमांडू में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 11:36 से 12:31 शुभ
अमृत काल 11:11 से 12:49 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 03:46 से 04:26 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिकाठमांडू में समय
राहु काल 06:51 से 08:35
यमगण्ड काल 10:19 से 12:03
दुर्मुहूर्त (पहला) 12:31 से 13:27
दुर्मुहूर्त (दूसरा) 15:18 से 16:13
वर्ज्यम् 23:32 से 01:11

ऊपर का हर समय काठमांडू के लिए सोमवार, 14 जून 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

निर्जला एकादशी 2027 पारण का समय

मंगलवार, 15 जून 2027, 13:27 से 16:14

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 15 जून, 08:29 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। इस बार हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) पूरे प्रातःकाल तक चलता है। हरि वासर में व्रत नहीं खोला जाता, और ऐसी स्थिति में परंपरा मध्याह्न बीतने तक रुकने को कहती है — इसलिए पारण अपराह्न में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

निर्जला एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
सोमवार, 14 जून 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
सोमवार, 14 जून 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; सोमवार, 14 जून 2027 का अरुणोदय (14 जून, 03:31) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन काठमांडू के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

निर्जला एकादशी व्रत कथा और महत्व

अन्य नाम: भीमसेनी एकादशी।

निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी है, उत्तर भारत की सबसे गर्म ऋतु में, और इसका व्रत निर्जल — बिना जल के भी — सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रखा जाता है। नीचे की कथा के कारण इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं। इस दिन जल से भरे घड़े, पंखे, छाते, शरबत और अन्न का दान किया जाता है और राहगीरों के लिए पानी रखा जाता है। उस गर्मी में निर्जल व्रत कठिन है, और कई परिवार वृद्ध, बीमार और गर्भवती सदस्यों के लिए हल्का व्रत रखते हैं।

निर्जला एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: ब्रह्मवैवर्त पुराण, एकादशी माहात्म्य, जहाँ व्यास जी भीम से बात करते हैं (हिंदी व्रत-कथा पुस्तकें इसे महाभारत की परंपरा से भी जोड़ती हैं)।

पांडव हर एकादशी का व्रत रखते थे — युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, द्रौपदी और माता कुंती, सब महीने में दो बार उपवास करते थे। भीम ऐसा नहीं कर पाते थे। वे कहते थे कि उनके पेट में वृक नाम की ऐसी अग्नि है जो भोजन से ही शांत होती है; वे दान कर सकते हैं, विष्णु की पूजा कर सकते हैं, पर बिना खाए एक दिन भी नहीं रह सकते।

चिंतित होकर वे व्यास जी के पास गए और पूछा कि क्या उन जैसे व्यक्ति के लिए भी एकादशी के पुण्य में भागी होने का कोई मार्ग है। व्यास जी ने उन्हें हर बार भूखा रहने को नहीं कहा।

उन्होंने कहा कि साल में एक दिन है — ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी। उस दिन पूरा व्रत रखो — आचमन के जल के सिवा न अन्न, न जल, सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक — और दूसरों को भोजन कराकर, जल और दान देकर पारण करो। यह एक व्रत सभी चौबीस एकादशियों का पुण्य देता है।

भीम ने यह व्रत रखा और यह उन्हीं के नाम पर भीमसेनी एकादशी कहलाया। व्यास जी कहते हैं कि जो इसे श्रद्धा से रखता है, जीवन के अंत में उसे यमदूत नहीं, विष्णु के दूत लेने आते हैं।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में निर्जला एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति काठमांडू के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 गुरुवार, 25 जून 2026 बीत गई
2027 सोमवार, 14 जून 2027 आने वाली
2028 शनिवार, 3 जून 2028 आने वाली

पंचांगों में निर्जला एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग निर्जला एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: निर्जला एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

निर्जला एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में निर्जला एकादशी कब है?

2027 में निर्जला एकादशी सोमवार, 14 जून को है। काठमांडू में एकादशी तिथि 14 जून, 02:27 से 15 जून, 02:24 तक रहेगी। पारण 15 जून को 13:27 से 16:14 तक है।

निर्जला एकादशी की तिथि क्या है?

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। काठमांडू में यह तिथि 14 जून, 02:27 से 15 जून, 02:24 तक है, और निर्जला एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

निर्जला एकादशी का पारण कब करें?

मंगलवार, 15 जून 2027 को 13:27 से 16:14 तक। इस बार हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) पूरे प्रातःकाल तक चलता है। हरि वासर में व्रत नहीं खोला जाता, और ऐसी स्थिति में परंपरा मध्याह्न बीतने तक रुकने को कहती है — इसलिए पारण अपराह्न में है।

दूसरे कैलेंडर में निर्जला एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल निर्जला एकादशी कब है?

2028 में शनिवार, 3 जून।

निर्जला एकादशी क्यों रखी जाती है?

निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी है, उत्तर भारत की सबसे गर्म ऋतु में, और इसका व्रत निर्जल — बिना जल के भी — सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रखा जाता है। नीचे की कथा के कारण इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं। इस दिन जल से भरे घड़े, पंखे, छाते, शरबत और अन्न का दान किया जाता है और राहगीरों के लिए पानी रखा जाता है। उस गर्मी में निर्जल व्रत कठिन है, और कई परिवार वृद्ध, बीमार और गर्भवती सदस्यों के लिए हल्का व्रत रखते हैं।

निर्जला एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा ब्रह्मवैवर्त पुराण, एकादशी माहात्म्य, जहाँ व्यास जी भीम से बात करते हैं (हिंदी व्रत-कथा पुस्तकें इसे महाभारत की परंपरा से भी जोड़ती हैं) में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव निर्जला एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों सोमवार, 14 जून 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।