रसोई घर का वास्तु

वास्तु में रसोई की सबसे अच्छी दिशा आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) है — अग्नि का कोना। नीचे आठों दिशाओं का पारंपरिक आकलन, चूल्हे, सिंक और फ़्रिज की जगह, और ईशान कोण की रसोई पर व्यावहारिक बात।

  • दिशाएँ ऐप के वास्तु कक्ष-नियमों से
  • चूल्हा, सिंक और फ़्रिज
  • महँगे बदलाव नहीं

वास्तु के अनुसार रसोई की दिशा

आठ दिशाओं में रसोई — वास्तु कक्ष-नियम
दिशारसोई के लिएदिशा के देवता
उत्तरकिसी सूची में नहींकुबेर
ईशान (उत्तर-पूर्व)टाली जाती हैईशान
पूर्वठीकइंद्र
आग्नेय (दक्षिण-पूर्व)सबसे अच्छीअग्नि
दक्षिणकिसी सूची में नहींयम
नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम)टाली जाती हैनैऋति
पश्चिमकिसी सूची में नहींवरुण
वायव्य (उत्तर-पश्चिम)ठीकवायु

दिशा घर के बीच (ब्रह्मस्थान) से नापी जाती है, सही उत्तर के हिसाब से। अपनी रसोई की दिशा जानने के लिए घर के बीच में खड़े होकर रसोई की ओर कंपास पढ़ें।

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रसोई के अंदर चूल्हा, सिंक और फ़्रिज

  • चूल्हा रसोई के आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) कोने में, और बहुत से घरों में पसंद है कि खाना बनाने वाला पूर्व की ओर देखे।
  • सिंक और पानी चूल्हे से दूर — परंपरा आग और पानी को अलग रखने को कहती है, और यह रसोई की सुरक्षा के लिए भी अच्छा है।
  • फ़्रिज के लिए परंपरा नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), दक्षिण और पश्चिम पसंद करती है और ईशान (उत्तर-पूर्व), आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) और मध्य (ब्रह्मस्थान) टालती है।
  • धुआँ और गर्मी बाहर जाने का रास्ता — खिड़की या चिमनी — किसी भी दिशा से ज़्यादा ज़रूरी है।

अगर रसोई ईशान कोण में है

ईशान (उत्तर-पूर्व) में रसोई परंपरा की सबसे बड़ी आपत्तियों में है, क्योंकि यह जल और आध्यात्म का कोना माना जाता है। पर यह कोई निदान या भविष्यवाणी नहीं है। केवल दिशा देखकर गैस, पानी या नाली की लाइनें न बदलें। पहले हवा, चूल्हे की दूरी, सफ़ाई और सुरक्षित जगह ठीक करें; बड़ा बदलाव तभी, जब मरम्मत वैसे भी हो रही हो।

वास्तु घर सजाने-बनाने का एक पारंपरिक ढाँचा है, स्वास्थ्य, धन या किसी परिणाम की गारंटी नहीं। केवल दिशा देखकर भवन की बनावट न बदलें; किसी योग्य इंजीनियर से सलाह लें।

लोग अक्सर क्या पूछते हैं

वास्तु के अनुसार रसोई किस दिशा में होनी चाहिए?

परंपरा में सबसे अच्छी दिशा आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) है, जो अग्नि का कोना है। वायव्य (उत्तर-पश्चिम) और पूर्व भी ठीक मानी जाती हैं; ईशान (उत्तर-पूर्व) और नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) टाली जाती हैं।

खाना बनाते समय किस दिशा की ओर मुँह होना चाहिए?

बहुत से घर पूर्व की ओर मुँह करके खाना बनाना पसंद करते हैं, चूल्हा रसोई के आग्नेय कोने में रखकर। जहाँ यह संभव न हो, वहाँ हवा और सुरक्षित जगह ज़्यादा ज़रूरी है।

क्या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रसोई गलत है?

परंपरा इसे सबसे बड़ी आपत्तियों में गिनती है, पर यह किसी बीमारी या घटना की भविष्यवाणी नहीं है। केवल दिशा के कारण गैस, पानी या नाली की लाइनें न बदलें; हवा, चूल्हे की दूरी और सफ़ाई पहले देखें।

सिंक और फ़्रिज कहाँ रखें?

चूल्हा और सिंक अलग रखें — आग और पानी साथ नहीं। फ़्रिज के लिए परंपरा नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), दक्षिण और पश्चिम पसंद करती है और ईशान (उत्तर-पूर्व), आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) और मध्य (ब्रह्मस्थान) टालती है।