कामिका एकादशी 2027 कब है?

2027 में कामिका एकादशी गुरुवार, 29 जुलाई को है। पुणे में एकादशी तिथि 29 जुलाई, 07:35 से 30 जुलाई, 05:13 तक रहेगी। पारण 30 जुलाई को 13:58 से 16:34 तक है।

कामिका एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यही तिथि श्रावण कृष्ण एकादशी कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय पुणे के लिए निकाला गया है।

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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

कामिका एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय

गुरुवार, 29 जुलाई 2027

तिथि
एकादशी, कृष्ण पक्ष
हिंदू मास
श्रावण (पूर्णिमांत) / आषाढ़ (अमांत)
तिथि आरंभ
29 जुलाई, 07:35
तिथि समाप्त
30 जुलाई, 05:13
दिन का निर्णय
सूर्योदय
पुणे में सूर्योदय
29 जुलाई, 06:10

इस बार तिथि क्षय है। एकादशी तिथि एक निर्णायक क्षण के बाद शुरू होकर अगले से पहले ख़त्म हो जाती है, यानी किसी को नहीं छूती, और सामान्य नियम दिन नहीं चुन पाता। पर्व रद्द नहीं होता: वह उस दिन मनाया जाता है जिस दिन यह तिथि चलती है, जो ऊपर की तारीख है। यह बताना ज़रूरी है — सिर्फ़ तारीख छापने का मतलब होता कि वह नियम लागू हुआ जो इस साल लागू नहीं हुआ।

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: कामिका एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

कामिका एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त

कामिका एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तपुणे में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 12:14 से 13:06 शुभ
अमृत काल 00:28 से 01:58 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 04:42 से 05:26 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिपुणे में समय
राहु काल 14:18 से 15:56
यमगण्ड काल 06:10 से 07:48
दुर्मुहूर्त (पहला) 10:30 से 11:22
दुर्मुहूर्त (दूसरा) 15:43 से 16:35
वर्ज्यम् 19:58 से 21:28

ऊपर का हर समय पुणे के लिए गुरुवार, 29 जुलाई 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

कामिका एकादशी 2027 पारण का समय

शुक्रवार, 30 जुलाई 2027, 13:58 से 16:34

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 30 जुलाई, 10:30 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। इस बार हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) पूरे प्रातःकाल तक चलता है। हरि वासर में व्रत नहीं खोला जाता, और ऐसी स्थिति में परंपरा मध्याह्न बीतने तक रुकने को कहती है — इसलिए पारण अपराह्न में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

कामिका एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख

उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में कामिका एकादशी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, और दक्षिण व पश्चिम भारत की अमांत गणना में आषाढ़ मास की। रात एक ही है — दोनों पद्धतियाँ कृष्ण पक्ष को अलग महीने के नाम से गिनती हैं।

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
गुरुवार, 29 जुलाई 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
शुक्रवार, 30 जुलाई 2027 — एकादशी (29 जुला, 07:35 से 30 जुला, 05:13) शुक्रवार, 30 जुलाई 2027 के अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — में भी है, इसलिए वैष्णव व्रत उस अगली सुबह रखा जाता है।

ऊपर का हर दिन पुणे के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

कामिका एकादशी व्रत कथा और महत्व

कामिका एकादशी चातुर्मास की पहली एकादशी है — पूर्णिमांत गणना में श्रावण कृष्ण पक्ष की, अमांत गणना में आषाढ़ कृष्ण की। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है: तुलसी दल चढ़ाना, उसके आगे दीप जलाना और उसके दर्शन तक को पुण्य बताया गया है, और शाम को घी या तिल के तेल के दीप जलाए जाते हैं।

कामिका एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: ब्रह्मवैवर्त पुराण, एकादशी माहात्म्य, जहाँ भीष्म यह कथा नारद को और श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को सुनाते हैं।

एक गाँव का ज़मींदार बहुत क्रोधी था। एक छोटी-सी बात पर उसका एक ब्राह्मण से झगड़ा हो गया। बात हाथापाई तक पहुँची और क्रोध में उसने ब्राह्मण पर ऐसा वार किया कि उसकी मृत्यु हो गई।

अपने किए से घबराकर उसने प्रायश्चित करना चाहा और ब्राह्मण का अंतिम संस्कार स्वयं करना चाहा, पर गाँव के बड़ों और पुरोहितों ने मना कर दिया। कोई उसके साथ भोजन नहीं करता था, कोई उसे पूजा-स्थल में नहीं आने देता था, और वह बहिष्कृत होकर जीने लगा।

दुखी होकर वह एक मुनि के पास गया और पूछा कि क्या कोई प्रायश्चित संभव है। मुनि ने उसे श्रावण कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी बताई — पूरी श्रद्धा से व्रत रखो, तुलसी और दीप से भगवान विष्णु की पूजा करो, और रात भर उनके स्मरण में जागो।

उसने ऐसा ही किया। पुराण कहता है कि उस हत्या का भार उससे उतर गया, और सपने में उसे बताया गया कि वह फिर समाज में लौट सकता है; ब्राह्मणों ने उसे फिर अपना लिया। भीष्म कहते हैं कि इस दिन चढ़ाया एक तुलसी दल भगवान को किसी रत्न या फूल से अधिक प्रिय है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में कामिका एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति पुणे के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 रविवार, 9 अगस्त 2026 बीत गई
2027 गुरुवार, 29 जुलाई 2027 आने वाली
2028 मंगलवार, 18 जुलाई 2028 आने वाली

पंचांगों में कामिका एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग कामिका एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: कामिका एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

कामिका एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में कामिका एकादशी कब है?

2027 में कामिका एकादशी गुरुवार, 29 जुलाई को है। पुणे में एकादशी तिथि 29 जुलाई, 07:35 से 30 जुलाई, 05:13 तक रहेगी। पारण 30 जुलाई को 13:58 से 16:34 तक है।

कामिका एकादशी की तिथि क्या है?

श्रावण (पूर्णिमांत) / आषाढ़ (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि। पुणे में यह तिथि 29 जुलाई, 07:35 से 30 जुलाई, 05:13 तक है, और कामिका एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

इस बार तिथि को क्षय क्यों बताया गया है?

एकादशी तिथि इस बार एक निर्णायक क्षण के बाद शुरू होकर अगले से पहले ख़त्म हो जाती है, यानी किसी को नहीं छूती — यह क्षय तिथि है। पर्व रद्द नहीं होता: वह उसी दिन मनाया जाता है जिस दिन तिथि चलती है, जो ऊपर दी गई तारीख है।

कामिका एकादशी का पारण कब करें?

शुक्रवार, 30 जुलाई 2027 को 13:58 से 16:34 तक। इस बार हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) पूरे प्रातःकाल तक चलता है। हरि वासर में व्रत नहीं खोला जाता, और ऐसी स्थिति में परंपरा मध्याह्न बीतने तक रुकने को कहती है — इसलिए पारण अपराह्न में है।

दूसरे कैलेंडर में कामिका एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल कामिका एकादशी कब है?

2028 में मंगलवार, 18 जुलाई।

कामिका एकादशी क्यों रखी जाती है?

कामिका एकादशी चातुर्मास की पहली एकादशी है — पूर्णिमांत गणना में श्रावण कृष्ण पक्ष की, अमांत गणना में आषाढ़ कृष्ण की। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है: तुलसी दल चढ़ाना, उसके आगे दीप जलाना और उसके दर्शन तक को पुण्य बताया गया है, और शाम को घी या तिल के तेल के दीप जलाए जाते हैं।

कामिका एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा ब्रह्मवैवर्त पुराण, एकादशी माहात्म्य, जहाँ भीष्म यह कथा नारद को और श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को सुनाते हैं में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव कामिका एकादशी अलग दिन है?

इस बार अलग है: स्मार्त तारीख गुरुवार, 29 जुलाई 2027 और वैष्णव (इस्कॉन) तारीख शुक्रवार, 30 जुलाई 2027। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय — सूर्योदय से 96 मिनट पहले — पर देखता है।