शुक्ल पक्ष · एकादशी तिथि · श्रावण
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2027 कब है?
2027 में श्रावण पुत्रदा एकादशी गुरुवार, 12 अगस्त को है। पुणे में एकादशी तिथि 12 अगस्त, 00:59 से 13 अगस्त, 03:00 तक रहेगी। पारण 13 अगस्त को 13:56 से 16:29 तक है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
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इस पेज का हर समय पुणे के लिए निकाला गया है।
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नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।
पुणे के लिए गणना
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय
गुरुवार, 12 अगस्त 2027
- तिथि
- एकादशी, शुक्ल पक्ष
- हिंदू मास
- श्रावण
- तिथि आरंभ
- 12 अगस्त, 00:59
- तिथि समाप्त
- 13 अगस्त, 03:00
- दिन का निर्णय
- सूर्योदय
- पुणे में सूर्योदय
- 12 अगस्त, 06:15
ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: श्रावण पुत्रदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
मुहूर्त · पुणे
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त
श्रावण पुत्रदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।
उस दिन के शुभ समय
| मुहूर्त | पुणे में समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:13 से 13:05 | शुभ |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:45 से 05:30 | शुभ |
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
| अवधि | पुणे में समय |
|---|---|
| राहु काल | 14:15 से 15:51 |
| यमगण्ड काल | 06:15 से 07:51 |
| दुर्मुहूर्त (पहला) | 10:31 से 11:22 |
| दुर्मुहूर्त (दूसरा) | 15:38 से 16:30 |
ऊपर का हर समय पुणे के लिए गुरुवार, 12 अगस्त 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।
पारण · पुणे
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2027 पारण का समय
शुक्रवार, 13 अगस्त 2027, 13:56 से 16:29
पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 13 अगस्त, 09:36 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। इस बार हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) पूरे प्रातःकाल तक चलता है। हरि वासर में व्रत नहीं खोला जाता, और ऐसी स्थिति में परंपरा मध्याह्न बीतने तक रुकने को कहती है — इसलिए पारण अपराह्न में है।
व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
शुक्ल पक्ष · श्रावण
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख
- इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
- गुरुवार, 12 अगस्त 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
- वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
- गुरुवार, 12 अगस्त 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; गुरुवार, 12 अगस्त 2027 का अरुणोदय (12 अग, 04:39) एकादशी में है, दशमी में नहीं।
ऊपर का हर दिन पुणे के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।
महत्व और व्रत कथा
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा और महत्व
अन्य नाम: पवित्रा एकादशी।
श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी है — साल की दो पुत्रदा एकादशियों में से एक; दूसरी पौष में आती है। संतान की कामना रखने वाले दंपती परंपरा से यह व्रत रखते आए हैं, और आज यह संतान के कल्याण की प्रार्थना के रूप में भी रखा जाता है। दक्षिण के कुछ भागों और वैष्णवों में यह पवित्रा (पवित्रोपना) एकादशी है, जब भगवान को पवित्र सूत्र अर्पित किया जाता है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी की कथा
संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: भविष्य पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य।
माहिष्मती के राजा महीजित धर्म से राज करते थे और प्रजा का ध्यान रखते थे, फिर भी उनके कोई पुत्र नहीं था, और यह दुख उन्हें सताता था। उनके मंत्रियों और नगर के बड़ों ने कारण जानने का निश्चय किया और किसी मुनि की खोज में वन गए।
वे महान तपस्वी लोमश ऋषि के पास पहुँचे, जो जन्मों के पार देख सकते थे। लोमश ने बताया कि पिछले जन्म में राजा एक निर्धन वैश्य थे। एक द्वादशी को गर्मी में यात्रा करते, प्यासे और थके हुए, वे एक तालाब पर पहुँचे जहाँ एक गाय अपने बछड़े के साथ पानी पी रही थी, और उन्होंने पहले स्वयं पीने के लिए उन्हें हटा दिया। वही निर्दयता उनके और पुत्र के बीच खड़ी है।
लोमश ने उपाय बताया: राजा की प्रजा मिलकर श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखे और उसका पुण्य अपने राजा को दे।
प्रजा ने श्रद्धा से व्रत रखा, रात भर जागरण किया और द्वादशी को पुण्य महीजित को अर्पित किया। पुराण कहता है कि कुछ ही समय बाद रानी गर्भवती हुईं और योग्य उत्तराधिकारी का जन्म हुआ। श्रीकृष्ण कहते हैं कि इसीलिए यह पुत्रदा एकादशी कहलाती है।
व्रत कैसे रखा जाता है
- व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
- एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
- भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
- पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।
उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
सभी 26 · पुणे
सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख
साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।
- पापांकुशा एकादशी · गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
- रमा एकादशी · गुरुवार, 5 नवंबर 2026
- देवउठनी एकादशी · शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
- उत्पन्ना एकादशी · शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
- मोक्षदा एकादशी · रविवार, 20 दिसंबर 2026
- सफला एकादशी · रविवार, 3 जनवरी 2027
- पौष पुत्रदा एकादशी · मंगलवार, 19 जनवरी 2027
- षटतिला एकादशी · मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027
- जया एकादशी · बुधवार, 17 फ़रवरी 2027
- विजया एकादशी · गुरुवार, 4 मार्च 2027
- आमलकी एकादशी · गुरुवार, 18 मार्च 2027
- पापमोचनी एकादशी · शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027
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- वरूथिनी एकादशी · रविवार, 2 मई 2027
- मोहिनी एकादशी · रविवार, 16 मई 2027
- अपरा एकादशी · मंगलवार, 1 जून 2027
- निर्जला एकादशी · सोमवार, 14 जून 2027
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अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ
आने वाले वर्षों में श्रावण पुत्रदा एकादशी की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति पुणे के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2026 | रविवार, 23 अगस्त 2026 | बीत गई |
| 2027 | गुरुवार, 12 अगस्त 2027 | आने वाली |
| 2028 | मंगलवार, 1 अगस्त 2028 | आने वाली |
पंचांगों में श्रावण पुत्रदा एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है
दो पंचांग श्रावण पुत्रदा एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
- तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
- महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
- दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: श्रावण पुत्रदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
- शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
आगे आने वाले त्योहार
- शारदीय नवरात्रि — रविवार, 11 अक्तूबर से सोमवार, 19 अक्तूबर 2026 तक
- दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) — शनिवार, 17 अक्तूबर 2026
- दुर्गा अष्टमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- महा नवमी — सोमवार, 19 अक्तूबर 2026
- दशहरा (विजयादशमी) — मंगलवार, 20 अक्तूबर 2026
- पापांकुशा एकादशी — गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
- शरद पूर्णिमा — रविवार, 25 अक्तूबर 2026
- करवा चौथ — गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026
संबंधित पेज
श्रावण पुत्रदा एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न
2027 में श्रावण पुत्रदा एकादशी कब है?
2027 में श्रावण पुत्रदा एकादशी गुरुवार, 12 अगस्त को है। पुणे में एकादशी तिथि 12 अगस्त, 00:59 से 13 अगस्त, 03:00 तक रहेगी। पारण 13 अगस्त को 13:56 से 16:29 तक है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी की तिथि क्या है?
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। पुणे में यह तिथि 12 अगस्त, 00:59 से 13 अगस्त, 03:00 तक है, और श्रावण पुत्रदा एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी का पारण कब करें?
शुक्रवार, 13 अगस्त 2027 को 13:56 से 16:29 तक। इस बार हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) पूरे प्रातःकाल तक चलता है। हरि वासर में व्रत नहीं खोला जाता, और ऐसी स्थिति में परंपरा मध्याह्न बीतने तक रुकने को कहती है — इसलिए पारण अपराह्न में है।
दूसरे कैलेंडर में श्रावण पुत्रदा एकादशी की तारीख अलग क्यों है?
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
अगले साल श्रावण पुत्रदा एकादशी कब है?
2028 में मंगलवार, 1 अगस्त।
श्रावण पुत्रदा एकादशी क्यों रखी जाती है?
श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी है — साल की दो पुत्रदा एकादशियों में से एक; दूसरी पौष में आती है। संतान की कामना रखने वाले दंपती परंपरा से यह व्रत रखते आए हैं, और आज यह संतान के कल्याण की प्रार्थना के रूप में भी रखा जाता है। दक्षिण के कुछ भागों और वैष्णवों में यह पवित्रा (पवित्रोपना) एकादशी है, जब भगवान को पवित्र सूत्र अर्पित किया जाता है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?
कथा भविष्य पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।
क्या स्मार्त और वैष्णव श्रावण पुत्रदा एकादशी अलग दिन है?
नहीं, इस बार दोनों गुरुवार, 12 अगस्त 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।