वरूथिनी एकादशी 2027 कब है?

2027 में वरूथिनी एकादशी रविवार, 2 मई को है। पुणे में एकादशी तिथि 1 मई, 18:54 से 2 मई, 19:52 तक रहेगी। पारण 3 मई को 06:06 से 08:40 तक है।

वरूथिनी एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यही तिथि वैशाख कृष्ण एकादशी कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

इस पेज का हर समय पुणे के लिए निकाला गया है।

सभी शहर देखें

नीचे की पूरी गणना आपके चुने शहर के लिए दोबारा होती है। यह सिर्फ़ घड़ी का फ़र्क नहीं: चंद्रोदय या प्रदोष से तय होने वाला पर्व दो शहरों में सचमुच अलग दिन पड़ सकता है, और भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद निकलने का समय एक घंटे से भी ज़्यादा बदल जाता है।

वरूथिनी एकादशी 2027: तारीख और तिथि का समय

रविवार, 2 मई 2027

तिथि
एकादशी, कृष्ण पक्ष
हिंदू मास
वैशाख (पूर्णिमांत) / चैत्र (अमांत)
तिथि आरंभ
1 मई, 18:54
तिथि समाप्त
2 मई, 19:52
दिन का निर्णय
सूर्योदय
पुणे में सूर्योदय
2 मई, 06:06

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: वरूथिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

वरूथिनी एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त

वरूथिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय पर होता है, जो एक क्षण है, अवधि नहीं — इसलिए तिथि से मेल करने के लिए कोई अलग खिड़की नहीं बनती। दिन के सामान्य शुभ समय नीचे दिए हैं; जहाँ पर्व का अपना मुहूर्त नहीं होता, वहाँ प्रायः अभिजित मुहूर्त लिया जाता है।

उस दिन के शुभ समय

मुहूर्तपुणे में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्त 12:06 से 12:57 शुभ
अमृत काल 18:12 से 19:54 सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त 04:37 से 05:22 शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

अवधिपुणे में समय
राहु काल 17:20 से 18:56
यमगण्ड काल 12:31 से 14:07
दुर्मुहूर्त (पहला) 17:13 से 18:05
वर्ज्यम् 08:02 से 09:44

ऊपर का हर समय पुणे के लिए रविवार, 2 मई 2027 के सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद पड़ने वाली अवधि भी इसी तारीख की मानी जाती है।

वरूथिनी एकादशी 2027 पारण का समय

सोमवार, 3 मई 2027, 06:06 से 08:40

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 3 मई, 01:55 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

वरूथिनी एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख

उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में वरूथिनी एकादशी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, और दक्षिण व पश्चिम भारत की अमांत गणना में चैत्र मास की। रात एक ही है — दोनों पद्धतियाँ कृष्ण पक्ष को अलग महीने के नाम से गिनती हैं।

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
रविवार, 2 मई 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
रविवार, 2 मई 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; रविवार, 2 मई 2027 का अरुणोदय (2 मई, 04:30) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन पुणे के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

वरूथिनी एकादशी व्रत कथा और महत्व

वरूथिनी एकादशी उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी है — अमांत गणना में चैत्र कृष्ण। वरूथिनी का अर्थ है रक्षा करने वाली, कवच जैसी। इस दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा होती है। इसके नियमों में संयम पर ज़ोर है: कई लोग बिना नमक का व्रत रखते हैं, दूसरे के घर का भोजन नहीं करते, और ज़रूरतमंदों को अन्न, तिल या जल का दान करते हैं।

वरूथिनी एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: भविष्योत्तर पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य।

राजा मांधाता नर्मदा के तट पर राज करते थे और अपने दान और तप के लिए जाने जाते थे। एक बार वे वन में गहरे ध्यान में खड़े थे, तभी पेड़ों के बीच से एक भालू निकला और उनका पैर चबाते हुए उन्हें घसीटने लगा।

मांधाता ने क्रोध में आकर अपना तप नहीं तोड़ा। उन्होंने भगवान विष्णु को पुकारा, और विष्णु ने प्रकट होकर सुदर्शन चक्र से भालू को मार गिराया। पर तब तक राजा का पैर बुरी तरह घायल हो चुका था, और वे इस हानि से दुखी थे।

भगवान ने कहा कि यह चोट उनके अपने किसी पुराने कर्म का फल है, और इससे उबरने का उपाय भी है: मथुरा जाकर वैशाख की वरूथिनी एकादशी का व्रत रखो और वहाँ मेरे वराह स्वरूप की पूजा करो।

मांधाता ने मथुरा जाकर वैसा ही व्रत रखा। पुराण कहता है कि उसके पुण्य से उनका शरीर फिर पूरा हो गया और अंत में वे विष्णुलोक गए। श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि इस व्रत का पुण्य लंबे तप के बराबर है, और यह रखने वाले की रक्षा करता है — इसके नाम का अर्थ भी यही है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2027 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

आने वाले वर्षों में वरूथिनी एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति पुणे के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

वर्षतारीखस्थिति
2026 सोमवार, 13 अप्रैल 2026 बीत गई
2027 रविवार, 2 मई 2027 आने वाली
2028 गुरुवार, 20 अप्रैल 2028 आने वाली

पंचांगों में वरूथिनी एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग वरूथिनी एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: वरूथिनी एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

वरूथिनी एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में वरूथिनी एकादशी कब है?

2027 में वरूथिनी एकादशी रविवार, 2 मई को है। पुणे में एकादशी तिथि 1 मई, 18:54 से 2 मई, 19:52 तक रहेगी। पारण 3 मई को 06:06 से 08:40 तक है।

वरूथिनी एकादशी की तिथि क्या है?

वैशाख (पूर्णिमांत) / चैत्र (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि। पुणे में यह तिथि 1 मई, 18:54 से 2 मई, 19:52 तक है, और वरूथिनी एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

वरूथिनी एकादशी का पारण कब करें?

सोमवार, 3 मई 2027 को 06:06 से 08:40 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

दूसरे कैलेंडर में वरूथिनी एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल वरूथिनी एकादशी कब है?

2028 में गुरुवार, 20 अप्रैल।

वरूथिनी एकादशी क्यों रखी जाती है?

वरूथिनी एकादशी उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी है — अमांत गणना में चैत्र कृष्ण। वरूथिनी का अर्थ है रक्षा करने वाली, कवच जैसी। इस दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा होती है। इसके नियमों में संयम पर ज़ोर है: कई लोग बिना नमक का व्रत रखते हैं, दूसरे के घर का भोजन नहीं करते, और ज़रूरतमंदों को अन्न, तिल या जल का दान करते हैं।

वरूथिनी एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा भविष्योत्तर पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव वरूथिनी एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों रविवार, 2 मई 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।