दुर्गा मंत्र: सर्वमंगल मांगल्ये, या देवी सर्वभूतेषु और अन्य
दुर्गा के सबसे प्रसिद्ध मंत्र मार्कण्डेय पुराण के देवी माहात्म्य से हैं, जिसे दुर्गा सप्तशती भी कहते हैं — वही पाठ जो नवरात्रि की नौ रातों में होता है।
सर्वमंगल मांगल्ये: दुर्गा स्तुति
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
Sarvamangalamangalye Shive Sarvarthasadhike
Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostu Te
स्रोत: देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) 11.10, मार्कण्डेय पुराण की नारायणी स्तुति में।
अर्थ: "हे सभी मंगलों में मंगलरूपा, शिवा, सब प्रयोजन सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी, नारायणी — तुम्हें नमस्कार।"
कब जपा जाता है: देवी पूजा के आरंभ और अंत में, और पूरी नवरात्रि में।
या देवी सर्वभूतेषु: देवी स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
Ya Devi Sarvabhuteshu Shaktirupena Samsthita
Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah
स्रोत: देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), अध्याय 5 — देवताओं की स्तुति। श्लोक-संख्या संस्करणों में अलग-अलग है।
अर्थ: "जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार, बार-बार नमस्कार।" देवी माहात्म्य में यही पंक्ति 'शक्ति' की जगह बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, छाया, माता जैसे दूसरे रूपों के साथ बार-बार आती है।
कब जपा जाता है: नवरात्रि भर, और जब भी देवी माहात्म्य का पाठ हो।
ॐ दुं दुर्गायै नमः: दुर्गा बीज मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः
Om Dum Durgayai Namah
स्रोत: पूजा-पद्धतियों में प्रयुक्त दुर्गा का पारंपरिक बीज मंत्र; कोई एक शास्त्रीय श्लोक-स्रोत नहीं।
अर्थ: "ॐ, दुं — दुर्गा को नमस्कार।" 'दुं' दुर्गा का बीज अक्षर है।
कब जपा जाता है: 108 बार, विशेषकर अष्टमी पर और नवरात्रि में।
दुर्गा मंत्र का जप कैसे करें
- एक ही मंत्र पर टिके रहें; हर कुछ दिनों में मंत्र बदलना साधना छूटने का सबसे आम कारण है।
- रोज़ एक ही समय पर बैठें, हो सके तो स्नान के बाद, पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके।
- 108 मनकों की माला पर जपें — एक माला सामान्य माप है — और बड़े सुमेरु मनके पर माला को लाँघें नहीं, पलट लें।
- शब्द साफ़ बोलें, उसी गति से जो निभ सके; गति से अधिक ध्यान मायने रखता है।
- दुर्गा का पारंपरिक समय मंगलवार या शुक्रवार, और नवरात्रि की नौ रातें है; रोज़ की साधना के लिए कोई भी दिन ठीक है।
मंत्र साधना भक्ति और चिंतन की परंपरा का हिस्सा है। यह चिकित्सा, कानूनी या आर्थिक सहायता का विकल्प नहीं है, और किसी मंत्र के साथ परिणाम का वादा नहीं जुड़ा है।
दुर्गा के 108 नाम
दुर्गा के 108 नामों की पारंपरिक सूची, हर नाम के लिप्यंतरण और अर्थ के साथ, उसी क्रम में जिसमें पाठ होता है।
दुर्गा मंत्र: सामान्य प्रश्न
दुर्गा मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?
रोज़ 108 की एक माला सामान्य माप है। कुछ लोग बड़ा संकल्प लेते हैं, जैसे ग्यारह माला, या चालीस दिनों में पूरी होने वाली कोई संख्या; जहाँ अंतर हो, अपने गुरु या परिवार की रीति का पालन करें।