हनुमान मंत्र: मनोजवं, अतुलितबलधामं और बीज मंत्र
हनुमान की उपासना साहस, स्थिरता और राम-भक्ति के लिए होती है। मंगलवार और शनिवार उनके दिन हैं, और परंपरा उनकी पूजा को मंगल और शनि से जोड़ती है।
मनोजवं मारुततुल्यवेगं: हनुमान श्लोक
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
Manojavam Marutatulyavegam Jitendriyam Buddhimatam Varishtham
Vatatmajam Vanarayuthamukhyam Shriramadutam Sharanam Prapadye
स्रोत: श्री राम रक्षा स्तोत्र (बुधकौशिक ऋषि का माना जाता है), श्लोक 33।
अर्थ: "मन जैसे वेगवान, वायु जैसे तीव्र, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानर-सेना के प्रमुख, श्रीराम के दूत — मैं उनकी शरण लेता हूँ।"
कब जपा जाता है: हनुमान चालीसा से पहले या अकेले, मंगलवार और शनिवार को।
अतुलितबलधामं: सुंदरकांड का मंगलाचरण
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥
Atulitabaladhamam Hemashailabhadeham Danujavanakrishanum Jnaninamagraganyam
Sakalagunanidhanam Vanaranamadhisham Raghupatipriyabhaktam Vatajatam Namami
स्रोत: गोस्वामी तुलसीदास, रामचरितमानस, सुंदरकांड: आरंभ के संस्कृत श्लोकों में तीसरा।
अर्थ: "अतुलनीय बल के धाम, सोने के पर्वत जैसे दमकते शरीर वाले, दानव-रूपी वन के लिए अग्नि, ज्ञानियों में अग्रणी, सभी गुणों के भंडार, वानरों के स्वामी, रघुपति के प्रिय भक्त, पवनपुत्र — उन्हें मैं नमन करता हूँ।"
कब जपा जाता है: सुंदरकांड का पाठ इसी से शुरू होता है, जिसे बहुत से घरों में मंगलवार और शनिवार को पढ़ा जाता है।
ॐ हं हनुमते नमः: हनुमान बीज मंत्र
ॐ हं हनुमते नमः
Om Ham Hanumate Namah
स्रोत: हनुमान मंत्र-संग्रहों में मिलने वाला पारंपरिक बीज मंत्र; वेद या पुराण में इसका स्रोत नहीं।
अर्थ: "ॐ, हं — हनुमान को नमस्कार।" 'हं' उनका बीज अक्षर माना जाता है।
कब जपा जाता है: मंगलवार और शनिवार को 108 बार।
हनुमान मंत्र का जप कैसे करें
- एक ही मंत्र पर टिके रहें; हर कुछ दिनों में मंत्र बदलना साधना छूटने का सबसे आम कारण है।
- रोज़ एक ही समय पर बैठें, हो सके तो स्नान के बाद, पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके।
- 108 मनकों की माला पर जपें — एक माला सामान्य माप है — और बड़े सुमेरु मनके पर माला को लाँघें नहीं, पलट लें।
- शब्द साफ़ बोलें, उसी गति से जो निभ सके; गति से अधिक ध्यान मायने रखता है।
- हनुमान का पारंपरिक समय मंगलवार या शनिवार है; रोज़ की साधना के लिए कोई भी दिन ठीक है।
मंत्र साधना भक्ति और चिंतन की परंपरा का हिस्सा है। यह चिकित्सा, कानूनी या आर्थिक सहायता का विकल्प नहीं है, और किसी मंत्र के साथ परिणाम का वादा नहीं जुड़ा है।
हनुमान के 108 नाम
हनुमान के 108 नामों की पारंपरिक सूची, हर नाम के लिप्यंतरण और अर्थ के साथ, उसी क्रम में जिसमें पाठ होता है।
हनुमान मंत्र: सामान्य प्रश्न
हनुमान की पूजा मंगलवार के साथ शनिवार को भी क्यों होती है?
मंगलवार मंगल का दिन है, जिनसे हनुमान के बल को जोड़ा जाता है। एक प्रचलित कथा के अनुसार शनि ने हनुमान को वचन दिया था कि वे उनके भक्तों को कष्ट नहीं देंगे, इसीलिए शनि का दिन शनिवार भी हनुमान-पूजा का दिन बन गया।
हनुमान मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?
रोज़ 108 की एक माला सामान्य माप है। कुछ लोग बड़ा संकल्प लेते हैं, जैसे ग्यारह माला, या चालीस दिनों में पूरी होने वाली कोई संख्या; जहाँ अंतर हो, अपने गुरु या परिवार की रीति का पालन करें।