विष्णु मंत्र: ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और शान्ताकारं

वैष्णव साधना के केंद्र में दो छोटे मंत्र हैं — आठ अक्षरों का अष्टाक्षर और बारह अक्षरों का द्वादशाक्षर — और एक ध्यान श्लोक, जिससे बहुत से लोग जप शुरू करने से पहले विष्णु का ध्यान करते हैं।

ॐ नमो नारायणाय: अष्टाक्षरी मंत्र

ॐ नमो नारायणाय

Om Namo Narayanaya

स्रोत: नारायण उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद), जो इसके आठ अक्षरों का वर्णन करता है।

अर्थ: "ॐ, नारायण को नमस्कार" — नारायण, जिनमें सभी प्राणियों का आश्रय है। ॐ के साथ इसके आठ अक्षर हैं, इसीलिए अष्टाक्षर।

कब जपा जाता है: रोज़, और विशेषकर एकादशी व गुरुवार को।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय: द्वादशाक्षरी मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

Om Namo Bhagavate Vasudevaya

स्रोत: भागवत पुराण 4.8.54, जहाँ नारद बालक ध्रुव को यह मंत्र देते हैं।

अर्थ: "ॐ, भगवान वासुदेव को नमस्कार।" ॐ के बाद बारह अक्षर, सबमें वास करने वाले वासुदेव रूप विष्णु को संबोधित।

कब जपा जाता है: तुलसी की माला पर रोज़ का जप, और एकादशी पर।

शान्ताकारं भुजगशयनं: विष्णु ध्यान श्लोक

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

Shantakaram Bhujagashayanam Padmanabham Suresham Vishvadharam Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhangam
Lakshmikantam Kamalanayanam Yogibhirdhyanagamyam Vande Vishnum Bhavabhayaharam Sarvalokaikanatham

स्रोत: पारंपरिक ध्यान श्लोक, जो विष्णु सहस्रनाम के आरंभिक श्लोकों में पढ़ा जाता है।

अर्थ: "मैं विष्णु को नमन करता हूँ: जो शांत स्वरूप हैं, शेषनाग पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है, देवताओं के स्वामी, संसार के आधार, आकाश जैसे व्यापक, मेघ जैसे श्याम, शुभ अंगों वाले, लक्ष्मी के प्रिय, कमल-नयन, योगियों के ध्यान से प्राप्त, संसार का भय हरने वाले और सभी लोकों के एकमात्र स्वामी।"

कब जपा जाता है: विष्णु पूजा या विष्णु सहस्रनाम से पहले पढ़ा जाता है।

विष्णु मंत्र का जप कैसे करें

  1. एक ही मंत्र पर टिके रहें; हर कुछ दिनों में मंत्र बदलना साधना छूटने का सबसे आम कारण है।
  2. रोज़ एक ही समय पर बैठें, हो सके तो स्नान के बाद, पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके।
  3. 108 मनकों की माला पर जपें — एक माला सामान्य माप है — और बड़े सुमेरु मनके पर माला को लाँघें नहीं, पलट लें।
  4. शब्द साफ़ बोलें, उसी गति से जो निभ सके; गति से अधिक ध्यान मायने रखता है।
  5. विष्णु का पारंपरिक समय गुरुवार, और एकादशी है; रोज़ की साधना के लिए कोई भी दिन ठीक है।

मंत्र साधना भक्ति और चिंतन की परंपरा का हिस्सा है। यह चिकित्सा, कानूनी या आर्थिक सहायता का विकल्प नहीं है, और किसी मंत्र के साथ परिणाम का वादा नहीं जुड़ा है।

विष्णु के 108 नाम

विष्णु के 108 नामों की पारंपरिक सूची, हर नाम के लिप्यंतरण और अर्थ के साथ, उसी क्रम में जिसमें पाठ होता है।

विष्णु के 108 नाम, अर्थ सहित

विष्णु मंत्र: सामान्य प्रश्न

विष्णु मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

रोज़ 108 की एक माला सामान्य माप है। कुछ लोग बड़ा संकल्प लेते हैं, जैसे ग्यारह माला, या चालीस दिनों में पूरी होने वाली कोई संख्या; जहाँ अंतर हो, अपने गुरु या परिवार की रीति का पालन करें।