मुख्य सामग्री पर जाएँ
Swarn Siddhi हिंदी ऐप पाएँ ऐप पाएँ ऐप खोलें
मेन्यू खोलें

राशि मेल · वैदिक और पश्चिमी

कन्या और तुला राशि का मेल

  • पश्चिमी: सेमी-सेक्सटाइल (पृथ्वी और वायु)
  • भकूट 0/7
  • ग्रह मैत्री 5/5

कन्या और तुला राशि का मेल: कन्या और तुला पड़ोसी हैं जिनमें व्यवस्था और सामंजस्य का प्रेम साझा है — कन्या उसे बारीकी में खोजती है, तुला रिश्तों में — और साथ मिलकर एक परिष्कृत, विचारशील घर बनाती हैं। वैदिक गुण मिलान में, जहाँ राशि का अर्थ चंद्र राशि है, कन्या और तुला उन 12 अंकों में से 5 पाती हैं जो दो चंद्र राशियाँ तय करती हैं: भकूट 7 में से 0 (2-12 अक्ष) और ग्रह मैत्री 5 में से 5।

अपना मिलान देखें: कुंडली मिलान

कन्या और तुला का प्रेम

तुला कन्या की देखभाल और बुद्धि को सराहती है; कन्या तुला की शालीनता और कूटनीति का आनंद लेती है। दोनों शिष्टता और शांति को महत्व देती हैं, दोनों को सुंदर, साफ़-सुथरा जीवन पसंद है, और एक-दूसरे के प्रति दोनों विनम्र रहती हैं।

कन्या छोटी-छोटी परवाहों से प्यार जताती है: सजग, व्यावहारिक और खुद की आलोचक; सुधार करके प्यार दिखाती है।

तुला साझेदारी में ही प्यार ढूँढती है: आकर्षक, न्यायप्रिय, टकराव से बचने वाली और फ़ैसले में धीमी।

कन्या और तुला में टकराव कहाँ

कन्या की आलोचना तुला की शांति भंग करती है, और तुला की दुविधा और सामाजिक भागदौड़ कन्या को खीझाती है। दोनों टकराव से तब तक बचती हैं जब तक वह जमा न हो जाए; कन्या को तुला सतही लग सकती है और तुला को कन्या ज़्यादा रूखी।

कन्या और तुला का रिश्ता कैसे निभे

छोटी समस्याएँ जल्दी और नरमी से उठाएँ। बारीकियाँ कन्या सँभाले और लोग तुला, और कन्या की व्यावहारिकता को तुला के संतुलन से मिलाएँ।

वैदिक मिलान: भकूट और ग्रह मैत्री

गुण मिलान में दो चंद्र राशियाँ क्या तय करती हैं
कूटकन्या और तुला
चंद्र राशियाँकन्या (Virgo) और तुला (Libra)
राशि स्वामीबुध और शुक्र
भकूट (7 में से)0 — 2-12 अक्ष (दोष)
ग्रह मैत्री (5 में से)5
दोनों मिलाकर (12 में से)5

चंद्र राशियाँ एक-दूसरे से दूसरी और बारहवीं हैं (द्विर्द्वादश): भकूट 0 देता है। परंपरा इस अक्ष को धन और रोज़ के खर्च से जोड़ती है। बुध और शुक्र में किसी ओर शत्रुता नहीं और मित्रता है, यह शास्त्रीय परिहार दोष को हल्का करता है; अंक 0 ही रहता है।

कन्या का स्वामी बुध है और तुला का शुक्र। बुध शुक्र को मित्र मानता है, और शुक्र बुध को मित्र: ग्रह मैत्री 5 में से 5 अंक देती है।

भकूट और ग्रह मैत्री वे दो कूट हैं जिन्हें चंद्र राशियाँ अकेले तय करती हैं, और जो किसी भी साथी को पहले गिनने पर एक जैसे रहते हैं। वर्ण और वश्य भी राशियाँ पढ़ते हैं पर इस पर निर्भर हैं कि वर कौन है; तारा, योनि, गण और नाड़ी के लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए।

पश्चिमी पढ़ाई: तत्व और दृष्टि

तत्व
पृथ्वी और वायु
प्रकृति
द्विस्वभाव और चर
दृष्टि
सेमी-सेक्सटाइल, 1 राशि की दूरी

पृथ्वी और वायु: तथ्य बनाम विचार; शुरू में दोनों को एक-दूसरे का सोचने का ढंग अनजाना लगता है।

चर और द्विस्वभाव: एक आगे चलता है, दूसरा ढल जाता है; ठीक चलता है जब तक ढलना एकतरफ़ा न हो।

पड़ोसी राशियाँ (सेमी-सेक्सटाइल): अलग तत्व अगल-बगल, हर एक के पास वह है जो दूसरे में कम है।

राशियों का मेल दो राशियों के स्वभाव की बात करता है, दो लोगों की नहीं: इसे परंपरा की प्रवृत्तियाँ मानें, और दो असली कुंडलियों का मिलान कुंडली मिलान से करें।

वैदिक और पश्चिमी पढ़ाई कहाँ मिलती है

यहाँ दोनों अलग होती हैं। पश्चिमी ज्योतिष पड़ोसी राशियों को हल्का, छोटा संबंध मानता है, जबकि वैदिक मिलान इसी 2-12 दूरी को भकूट दोष कहकर 0 अंक देता है।

वैदिक राशि निरयण पद्धति में चंद्रमा की राशि है; पश्चिमी राशि आम तौर पर सायन पद्धति में सूर्य की। आपकी दोनों राशियाँ अक्सर अलग होती हैं, इसलिए देख लें कि कौन-सी पढ़ाई आपकी है।

अपना मिलान देखें

दो राशियाँ बस शुरुआत हैं। आपका अपना मिलान दोनों की पूरी कुंडली पढ़ता है — गुण मिलान के सभी 36 अंक, मांगलिक दोष और सातवाँ भाव — इसलिए कन्या और तुला की कोई भी जोड़ी कितने भी अंक पा सकती है।

कन्या और तुला हर राशि के साथ

कन्या और तुला राशि का मेल: सामान्य प्रश्न

क्या कन्या और तुला राशि का मेल अच्छा है?

कन्या और तुला पड़ोसी हैं जिनमें व्यवस्था और सामंजस्य का प्रेम साझा है — कन्या उसे बारीकी में खोजती है, तुला रिश्तों में — और साथ मिलकर एक परिष्कृत, विचारशील घर बनाती हैं। वैदिक गुण मिलान में, जहाँ राशि का अर्थ चंद्र राशि है, कन्या और तुला उन 12 अंकों में से 5 पाती हैं जो दो चंद्र राशियाँ तय करती हैं: भकूट 7 में से 0 (2-12 अक्ष) और ग्रह मैत्री 5 में से 5। किसी जोड़े का अपना मिलान दोनों की जन्म कुंडली से होता है।

क्या कन्या और तुला राशि में भकूट दोष है?

हाँ। चंद्र राशियाँ एक-दूसरे से दूसरी और बारहवीं हैं (द्विर्द्वादश): भकूट 0 देता है। परंपरा इस अक्ष को धन और रोज़ के खर्च से जोड़ती है। बुध और शुक्र में किसी ओर शत्रुता नहीं और मित्रता है, यह शास्त्रीय परिहार दोष को हल्का करता है; अंक 0 ही रहता है।

कन्या और तुला राशि के कितने गुण मिलते हैं?

केवल दो राशियों से कोई ईमानदार कुल संख्या नहीं बनती। गुण मिलान के 36 अंकों में से 12 अकेले दो चंद्र राशियाँ तय करती हैं, और कन्या और तुला उनमें से 5 पाती हैं। बाकी 24 दोनों के जन्म नक्षत्र पर और, उनमें से 3, इस पर निर्भर हैं कि वर कौन है, इसलिए अपना कुल अंक कुंडली मिलान से जानें।

क्या मेरी पश्चिमी राशि और मेरी चंद्र राशि एक है?

अक्सर नहीं। पश्चिमी राशि आम तौर पर सायन पद्धति में सूर्य की राशि होती है; चंद्र राशि निरयण पद्धति में चंद्रमा की राशि है, और वैदिक मिलान चंद्र राशि पढ़ता है। राशि कैलकुलेटर आपकी जन्म तिथि, समय और स्थान से आपकी चंद्र राशि बताता है।