गायत्री मंत्र: अर्थ, अनुवाद और हर शब्द की व्याख्या
गायत्री मंत्र ऋग्वेद का एक मंत्र है, जो सविता — सबको गति देने वाली शक्ति के रूप में सूर्य — को संबोधित है। पाठ में इससे पहले ॐ और तीन व्याहृतियाँ — भूः, भुवः, स्वः — बोली जाती हैं, और इसे दिन की संधियों में जपा जाता है।
गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः ।
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि ।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
Om Bhurbhuvah Svah
Tatsaviturvarenyam Bhargo Devasya Dhimahi
Dhiyo Yo Nah Prachodayat
स्रोत: ऋग्वेद 3.62.10, ऋषि विश्वामित्र। इससे पहले ॐ और तीन व्याहृतियाँ — भूः, भुवः, स्वः — बोली जाती हैं, जैसा तैत्तिरीय आरण्यक (2.11) में विधान है।
अर्थ: "हम सविता देव के उस श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं; वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।"
कब जपा जाता है: तीनों संध्याओं में — सूर्योदय, मध्याह्न और सूर्यास्त — प्रायः 108 की माला पर।
हर शब्द का अर्थ
| शब्द | लिप्यंतरण | अर्थ |
|---|---|---|
| ॐ | Om | पवित्र प्रणव अक्षर |
| भूः | Bhuh | पृथ्वी लोक |
| भुवः | Bhuvah | पृथ्वी और आकाश के बीच का लोक |
| स्वः | Svah | स्वर्ग लोक |
| तत् | Tat | उस |
| सवितुः | Savituh | सविता, प्रेरक सूर्य देव का |
| वरेण्यम् | Varenyam | श्रेष्ठ, वरण करने योग्य |
| भर्गः | Bhargah | तेज, प्रकाश |
| देवस्य | Devasya | देव का |
| धीमहि | Dhimahi | हम ध्यान करते हैं |
| धियः | Dhiyah | बुद्धियों को |
| यः | Yah | जो |
| नः | Nah | हमारी |
| प्रचोदयात् | Prachodayat | प्रेरित करें |
गायत्री मंत्र का जप कैसे करें
- एक ही मंत्र पर टिके रहें; हर कुछ दिनों में मंत्र बदलना साधना छूटने का सबसे आम कारण है।
- रोज़ एक ही समय पर बैठें, हो सके तो स्नान के बाद, पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके।
- 108 मनकों की माला पर जपें — एक माला सामान्य माप है — और बड़े सुमेरु मनके पर माला को लाँघें नहीं, पलट लें।
- शब्द साफ़ बोलें, उसी गति से जो निभ सके; गति से अधिक ध्यान मायने रखता है।
- गायत्री का पारंपरिक समय हर दिन, सूर्योदय पर है; रोज़ की साधना के लिए कोई भी दिन ठीक है।
मंत्र साधना भक्ति और चिंतन की परंपरा का हिस्सा है। यह चिकित्सा, कानूनी या आर्थिक सहायता का विकल्प नहीं है, और किसी मंत्र के साथ परिणाम का वादा नहीं जुड़ा है।
गायत्री मंत्र: सामान्य प्रश्न
गायत्री मंत्र कहाँ से है?
यह मंत्र ऋग्वेद 3.62.10 है, जिसके ऋषि विश्वामित्र माने जाते हैं और जो गायत्री छंद में है — इसी से इसका नाम है। इससे पहले बोले जाने वाले ॐ और भूर्भुवः स्वः वैदिक अनुष्ठान-परंपरा से आते हैं।
गायत्री मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?
रोज़ 108 की एक माला सामान्य माप है। कुछ लोग बड़ा संकल्प लेते हैं, जैसे ग्यारह माला, या चालीस दिनों में पूरी होने वाली कोई संख्या; जहाँ अंतर हो, अपने गुरु या परिवार की रीति का पालन करें।